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Tuesday, November 22, 2016

Casting Couch :स्टारडम का रास्ता बैडरूम से होकर जाता है ?

किसी फेवर के बदले सेक्स !! पुरुषों का यह मनोविकार लगभग जीवन के हरेक व्यावसायिक क्षेत्र में पाया जाता है। यद्धपि इसकी शिकायत कोई नहीं करता परंतु यह सर्वविदित है कि भाषाओ , कल्चर  और भोगोलिक सीमाओ के परे यह बिमारी दुनिया के हरेक देश  में मौजूद है। आमजन और सिने जगत की ख़बरों में दिलचस्पी रखने वाले इसे ''कास्टिंग काउच '' के नाम से जानते है। आमतौर पर इसकी शिकार शिकायत दर्ज नहीं करती , जब तक कि वह किसी प्रभावशाली बैकग्राउंड से न हो।
फिल्मों में छोटा सा रोल पाने के लिए नवोदित अभिनेत्रियों की भीड़ निर्माताओ और स्टूडियोज के इर्दगिर्द मंडराती रहती है। स्ट्रगल के दौर में  महज एक ब्रेक के लिए इनकी मानसिक  हालात ऐसी हो जाती है कि ये लोग स्थापित एक्टर से लेकर फाइनेन्सर तक का शिकार बनती है। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक इस तरह के किस्सों की कमी नहीं है। गूगल कर लीजिये।  हिंदी फिल्मों की दस जानी पहचानी  अभिनेत्रियां इस नरक को भुगत कर अपनी आपबीती दुनिया के सामने ला चुकी है।
इस दुष्चक्र और अपमान से युवा लड़कियों को बचाने के लिए एक समय के लोकप्रिय सितारे '' अन्ना '' सुनील शेट्टी ने पहल की है।  सुनील ने अपने कास्टिंग डायरेक्टर मित्र मुकेश छाबड़ा के साथ मिलकर एक कंपनी '' ऍफ़ द कास्टिंग '' की शुरुआत की है।  यह कंपनी नवोदित अभिनेत्रियों को ऑनलाइन ऑडिशन का प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगी।
उम्मीद की जा सकती है कि देश के छोटे शहरो और कस्बों से आने वाली लडकियां मुम्बई आने की चकाचोंध में इस तरह के अंधेरों से बच जायेगी। परंतु यह भी मानना कि casting couch से एकदम मुक्ति मिल जायेगी , असंभव है।
यह समस्या पुरुषों की लोलुप मानसिकता से उपजी है। वे कब किसे अपना अगला शिकार बनायेगे, कहा नहीं जा सकता। इस बिमारी की जड़ें कितनी गहरी है इसका अंदाजा गुजरे समय की नंबर वन अभिनेत्री रेखा के इंटरव्यू से लगाया जा सकता है। उनसे पूछा गया था कि टॉप पर पहुँचने का शॉर्टकट क्या है ? बिंदास रेखा ने अंग्रेजी में जवाब दिया था '' स्टारडम का रास्ता बैडरूम से होकर जाता है ''

image courtesy: google

Thursday, October 13, 2016

Rain man ( 1988) रिश्तो को खोजती फिल्म

यूँ तो कोई भी पूर्ण नहीं होता। थोड़ी बहुत कमी लगभग सभी में होती है। आमतौर पर सामान्य दिखने वाला व्यक्ति कितनी विकृतिया साथ लिए घूम रहा होता है , एकदम से  पता नहीं चलता। परंतु दुर्भाग्यवश कुछ
 लोग ऐसे  भी होते है जो जन्म से ही कुछ मानसिक कमियों के साथ धरती पर आते है।  इन्हें सारी  उम्र किसी न किसी पर निर्भर रहना पड़ता है। नब्बे फ़ीसदी मामलों में इन लोगों को सहारा परिवार ही देता परंतु सामाजिक स्तर पर इन्हें बराबरी का सम्मान नहीं मिलता।
इस ब्लॉग में  में आज जिस फिल्म की बात करने जा रहा हु उसका नायक savant syndrome से पीड़ित है। इस पात्र को निभाने वाले एक्टर Dustin Hoffman ने भूमिका को इतनी संवेदनशीलता से जिया था कि महज 100  दिनों में इस तरह की बीमारी या मानसिक मंदबुद्धि को लेकर इतनी जागरूकता आ  गई जितनी 101 साल में नहीं हो  पाई थी।

चार्ली बेबीट ( टॉम क्रूज ) लॉस एंजेल्स में एक ऑटोमोबाइल सेल्समेन है। स्वभाव से स्वार्थी और थोड़ा लालची भी। उसके पिता अपनी वसीयत में  उसके नाम चालू हालात में  एक पॉकेट वाच और 1949 मॉडल की  ब्यूक रोडमास्टर कार छोड़ गए है। उसका गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच जाता है जब उसे मालुम पड़ता कि वे  3 मिलियन डॉलर का खजाना उसके बड़े मंदबुद्धि भाई रेमंड के नाम कर गए है जो इस समय एक सैनेटोरियम में दुनियाई हकीकत से अनजान जीवन बिता रहा है। चार्ली अपने बड़े भाई का अपहरण कर लेता है ताकि खुद को रेमंड का लीगल गार्जियन बनाकर पैसा हड़प  सके।
रेमंड जिस मनोदशा से गुजर रहा है उसके कुछ अच्छे पहलु भी है। उसकी याददाश्त कमाल की है। वह सिनसिनाटी की टेलीफोन डायरेक्टरी A से G तक एक रात में कंठस्थ कर लेता है। मैथ्स का बड़ा से बड़ा सम वह बगैर देखे बोल देता है। चार्ली अपने लालच के लिए  उसे ताश का खेल ब्लैक जैक सीखा देता जिससे वह लॉस वेगास में काफी कमाई कर लेता है।   रेमंड और चार्ली सड़क मार्ग से सिनसिनाटी से लॉस एंजेल्स की यात्रा करते है क्योंकि रेमंड को प्लेन में सवार होने से डर लगता है।  चार्ली को विरासत में मिली रोडमास्टर कार से यह सफर 6 दिन में पूरा होता है क्योंकि रेमंड रात में और बारिश में सफर करने से मना कर देता है। यह
रोड ट्रिप चार्ली को बदल देती है। चार्ली महसूस करता है कि उसे अपने भाई को कुछ सिखाना चाहिए परंतु वह पाता है कि रेमंड ' स्पेशल ' है।आटिज्म ने जो दिवार उसके सामने कड़ी की थी वह दरकने लगती है साथ ही चार्ली जिस स्वार्थ और लालच की दिवार में कैद था वह भी ढह जाती है रेमंड भावनाएं और स्नेह समझने लगता।लेकिन बचपन की कुछ कड़वी स्मृतियों की वजह से उसे दौरे पड़ते रहते है।  चार्ली को मालूम होता है कि उसकी तरह रेमंड को भी ' बीटल्स ' पसंद है। लॉस एंजेल्स में एक डॉक्टर चार्ली को ढाई लाख डॉलर लेकर रेमंड को हमेशा के लिए भूलने की पेशकश करता है परंतु चार्ली  ऑफर को ठुकरा देता है। अब उसे अपने पिता से भी कोई शिकायत नहीं है।  वह अपने भाई की खुद देखभाल करना चाहता है. वह रेमंड से प्यार करने लगा  परंतु रेमंड तय नहीं कर पाता कि वह चार्ली के साथ रहे या सेनेटोरियम लौट जाए। चार्ली रेमंड को सेनेटोरियम  लौट जाने देता है।
टॉम क्रूस इस फिल्म के केंद्र में है  परंतु डस्टिन हॉफमैन का चरित्र इस फिल्म की जान है  । 1988 की इस न भुलाये जाने वाली फिल्म ने चार ऑस्कर अवार्ड हासिल किये थे।

दिस इस नॉट अ पोलिटिकल पोस्ट

शेयर बाजार की उथल पुथल में सबसे ज्यादा नुकसान अपने  मुकेश सेठ को हुआ है। अरबपतियों की फेहरिस्त में अब वे इक्कीसवे नंबर पर चले गए है। यद्ध...