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Wednesday, May 3, 2017

नयी डगर पर दर्शक

टीवी दर्शकों के लिए एक बहुत ही कॉमन शब्द है ' काउच पोटैटो ' . इस शब्द का हिंदी मतलब है निहायत ही आलसी व्यक्ति जो टीवी देखने का इतना शौकीन है कि   खाना भी टीवी के सामने बैठकर ही खाता है। मौजूदा दौर में यह शब्द इतना लोकप्रिय हुआ है एवं  आम टीवी  दर्शकों के लिए भी उपयोग किया जाने लगा है। हाल ही में आये एक सर्वेक्षण से स्पस्ट हुआ है कि दुनिया भर में टेलीविज़न दर्शको की संख्या में जबरदस्त गिरावट आई है। अकेले भारत की बात होती तो हम आसानी  से दोयम दर्जे के कार्यक्रमों को इसकी वजह मान सकते थे। अनवरत चलने वाले संयुक्त परिवार के आपसी मन मुटाव , दकियानूसी फैशनेबल महिलाओ के षड़यंत्र दर्शाते तथाकथित सामजिक सीरियल और बेहूदगी की सीमा को लांघते कॉमेडी शोज  ने गंभीर दर्शकों को टीवी से काफी पहले ही दूर कर दिया था। परन्तु जब गिरावट का रुझान वैश्विक हो तो निश्चय ही बड़ा कारण होगा।
सर्वे में दर्शको के खिसक जाने  की बड़ी  वजह स्मार्ट फ़ोन बना है। पिछले चार पांच वर्षों  में दुनिया भर में थ्री जी और फोर जी के मोबाइल का चलन तेजी से बड़ा है। जिसने मोबाइल पर टीवी देखने की सुविधा उपलब्ध करा दी। इस उपलब्धि ने  विज्ञापन के लिए भी  नया प्लेटफार्म बना दिया। चुनांचे दर्शकों को शिफ्ट होना  ही था और वे तेजी से हो भी रहे है। देश में  ' रिलायंस जियो ' के धमाकेदार आगमन ने  पलायन को तेजी से बढ़ाया। महज तीन माह  में दस करोड़ ग्राहक का  आंकड़ा इसके पहले किसी कंपनी ने नहीं  छुआ।  
मोबाइल पर ऑन डिमांड वीडियो उपलब्ध कराने की शुरुआत सबसे पहले  ' नेटफ्लिक्स ' ने अमेरिका से की। 1997 में बनी यह कंपनी आज दुनिया भर में ऑन  डिमांड मूवी , टीवी शोज ,वीडियो उपलब्ध कराती है। इ कॉमर्स पोर्टल अमेज़न ने 2006 में शुरुआत की परन्तु मात्र दस वर्षों में इसके ग्राहकों की संख्या 8 करोड़ हो  गई। इसकी लोकप्रियता की वजह इसका न्यूनतम शुल्क है। महज पांच सौ रूपये वार्षिक शुल्क पर अनगिनत फिल्मों और टीवी शोज का लुत्फ़ लिया जा सकता है। इन दोनों ही कंपनियों ने बड़े भारतीय स्टूडियो के साथ मिलकर मोबाइल पर फिल्मे रिलीज़ करने की भी  योजना बनाई है। 
भारत के 90 करोड़ मोबाइल धारी किसी भी कंपनी के लिए एक बड़ी संभावना है। भारत में टीवी दर्शकों की संख्या यूरोप की आबादी से ज्यादा है। 
विकासवाद के सिद्धांत की विशेषता है कि हर नयी परिष्कृत तकनीक पुरानी को चलन से बाहर कर देती है। रेडियो को टेलीविज़न ने लगभग बाहर कर दिया था। उसे  ' फ्रेक्वेंसी मॉडुलेशन ' ( ऍफ़ एम् ) का सहारा लेकर अपना अस्तित्व बचाना पड़ा। लैंडलाइन टेलीफोन के साथ भी यही हो रहा है। टेलीविज़न ने वह दौर भी देखा है जब CNN दुनिया भर में एक हजार प्रतिशत की दर से बढ़ रहा था और भारत में दूरदर्शन के  प्रसारण टावर प्रतिदिन स्थापित हो रहे थे। 
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Thursday, September 11, 2014

Modern Family ( TV Series )

परिवार किन चीजों से बनता है ? आपके जेहन में तुरंत कुछ बिंदु उभर आयेगे जैसे , त्याग, समर्पण , प्रेम , विश्वास , थोड़ी चुहल बाजी , थोड़ी बेवकूफी , थोड़ी समझदारी , गुस्सा , क्षणिक जलन , ये सारे तत्व एक सफल परिवार में होना जरुरी है।  फिर चाहे वह भारतीय परिवार हो या अमेरिकन। कमोबेश हर देश के परिवारों में ये बाते समान रूप   से पायी जाती रही है। इन्ही तत्वों को ध्यान में रखकर दो अमेरिकन निर्माताओ क्रमश क्रिस्टोफर लॉयड और स्टीवन लेवितान ने एक पारिवारिक टी वी धारावाहिक की कल्पना की और मंथन के बाद जो सामने आया वह था सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी शो '' मॉडर्न फैमिली '' 23 सितम्बर 2009 को ABC टेलेविज़न पर दस्तक देने के बाद हाल ही में इसने पांचवा सीजन संपन्न किया है।
                        एक आम मिडिल क्लास अमेरिकन परिवार कैसा होता है उसकी झलक   'मॉडर्न फैमिली '  में बखूबी दिखाई देती है। निर्माताओ का सोच भी यही था की भले ही कहानी काल्पनिक हो लेकिन पात्र और इनका रहन सहन वास्तविक होना चाहिए।  तीन परियारों के इर्द गिर्द घूमता कथानक ऑउटडोर लोकेशन के दृश्यों में इतना रियल हो जाता है की दर्शक को वह कहानी नहीं वरन डॉक्यूमेंट्री लगने लगता है। इस टी वी सीरियल ने एकऔर  बात को स्थापित किया है कि दूर संचार के बढ़ते साधनो ( means of telecommunications ) ने  लोगो के अंदर दूसरों के प्रति सोंच को बदल कर  रख दिया  है . मोबाइल फ़ोन के अत्यधिक प्रयोग से  लोगों का एक दूसरे के घर आना जाना ख़त्म होगया  है जिस की वजह से मनुष्य अकेलेपन के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है . टेक्नॉलॉजी ने पहला शिकार सामाजिकता का किया है।  परोक्ष रूप से यह सन्देश देने में मॉडर्न फैमिली सफल रहा है।
  
              भारत में टेलीविजन के उदभव के समय दूरदर्शन ने मनोहर श्याम जोशी लिखित '' हम लोग '' का प्रसारण आरम्भ किया था जिसे जबरदस्त लोकप्रियता मिली थी।  आज 30 साल बाद भी  'हम लोग ' लोगों के जेहन में सिर्फ इसलिए है  क्योंकि उसने एक माध्यम वर्गीय परिवार के सपनो और तकलीफों को सपाट लहजे में पेश किया था।
                           मुझे नहीं मालुम कि ' मॉडर्न फैमिली ' के पात्रों ने  'हम लोग' के बारे में कुछ सुना या  नहीं ?  परन्तु दोनों धारावाहिक समय के दो छोर पर खड़े होकर एक ही बात करते प्रतीत होते है कि परिवार समाज की एक महत्त्व पूर्ण इकाई है और इसका बिखरना समाज के बिखराव की शुरुआत है।
( मॉडर्न फैमिली के हिस्से  में इस हफ्ते एक और उपलब्धि जुडी है।  इस धारावाहिक की प्रमुख पात्र कोलम्बियाई  मूल की अभिनेत्री सोफ़िया वेरगारा स्क्रीन नाम ग्लोरिया प्रिशेत् फ़ोर्ब्स पत्रिका के अनुसार लगातार तीसरे वर्ष टेलीविजन पर सर्वाधिक कमाई करने वाली एक्टर बनी है। सोफ़िया प्रति एपिसोड 3.25 लाख डॉलर मेहनताना लेती है )
           

दिस इस नॉट अ पोलिटिकल पोस्ट

शेयर बाजार की उथल पुथल में सबसे ज्यादा नुकसान अपने  मुकेश सेठ को हुआ है। अरबपतियों की फेहरिस्त में अब वे इक्कीसवे नंबर पर चले गए है। यद्ध...