Sunday, September 28, 2014

Biopic of Sunny leone ? सनी लीओन की आत्मकथा !!!



हमारे देश में इतने महापुरषों ने जन्म लिया है कि प्रेरणा लेने के लिए बाहर झाँकने की भी आवश्यकता नहीं है .पिछले ढाई हजार सालों के इतिहास में इतने मेघावी और उर्जावान लोग हुए है कि हम उनके नाम भी अपने जीवन काल में पुरे नहीं  पढ़ पायेंगे . आत्मकथाओ के पढने की बात आती है तो औसतन दो तीन प्रतिशत पढ़े लिखे मिलेंगे जिन्होंने अपने स्कूल के बाद आत्मकथाए पढने का ‘ साहस ‘ दिखाया होगा . इधर कुछ वर्षों से कुछ साहसी फिल्मकारों ने ‘ बायोपिक ‘ फिल्मे बनाने का जोखिम उठाया है .
ये लोग बहुत हद तक सफल भी रहे है . हिंदी फिल्मों के इतिहास को टटोला जाए तो दादा साहेब फाल्के का नाम भी आता है , जिन्होंने अपनी दो दर्जन फिल्मों में से  कुछ कहानिया वास्तविक लोगों के जीवन से उठा कर प्रस्तुत की थी . हाल के वर्षों में ‘ भाग मिल्खा भाग ‘ पान सिंह तोमर ‘ और मेरिकोम ‘ जेसी फिल्मे थोडा कमर्शियल तड़का लगाने के बाद बेहतरीन और यादगार बायोपिक के रूप में आकर सफल और सराही गई है .

विगत दिनों देश के राष्ट्रीय अखबारों में एक नयी बायोपिक फिल्म की घोषणा जोर शोर से की गई . फुल पेज के रंगीन विज्ञापन बता रहे थे कि  अगली बायोपिक क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ( एम् एस धोनी ) पर होगी . इस बात पर किसी को आपति नहीं होगी और न ही होना चाहिए. कोई किसी पर भी बायोपिक  फिल्म बना सकता है , फिर वे सनी लीओन ही क्यों न हो? अंध क्रिकेट प्रेमियों की बात छोड़ दी जाए तो शायद किसी को भी इस बात में दिलचस्पी नहीं होगी .क्रिकेट सट्टे  बाजी में उनका नाम आने के बाद उनकी साख पर काफी बट्टा लगा है . यह बात जरुर है कि उनकी कई पारियां शानदार रही है .
उनके किसी रोमांचक मैच को लेकर उत्तेजना से भरी  कोई फिल्म अवश्य बनाई जासकती है . अभी धोनी का करियर ख़त्म नहीं हुआ है . इस लिहाज से बायोपिक की बात करना बहुत जल्दबाजी वाला निर्णय होगा . ठीक वैसे ही जैसे इन दिनों मोदी मुग्ध लोग और मीडिया मोदी की अमेरिका यात्रा को लेकर गुलजार हुए जा रहे है . मीडिया इस यात्रा को अन्तराष्ट्रीय घटना बताने पर तुला हुआ है लेकिन बी बी सी का मानना है कि इस यात्रा की  तकनिकी रूप से जरुरत नहीं थी . अलीगढ विश्वविद्यालय में पदस्थ मेरे मित्र शाहिद खान ने मोदी की अमेरिकी यात्रा पर बारीक नजर रखते हुए अमेरिका के दस बड़े अखबारों को ट्रेक किया है. खान साहब का विश्लेषण है कि इनमे मोदी को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है .इससे ज्याद हल्ला तो बारबडोस के मेयर के आने पर हो जाता है.

 बहरहाल,  देश हॉकी के जादूगर ध्यान चंद पर मनमोहन शेट्टी द्वारा घोषित फिल्म की प्रतीक्षा कर रहा है . बताया जा रहा है कि यह अभी पटकथा लेखन के स्तर पर है .
photo courtesy  google images.

Thursday, September 25, 2014

No sex please ! we are indian . नो सेक्स प्लीज !!

 खबर है कि ब्रिटेन के पूर्व एवं  आकर्षक व्यक्तित्व के धनी  प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की पत्नी चेरी ब्लेयर ( जो स्वयं भी काफी सुन्दर है ) ने ढेर सारी  साड़ियां खरीदी है।  यह बात हम भारतीयों प्रभावित कर सकती है कि  एक ऐसे देश के शासक की पत्नी अपने परिधान में भारतीय कपड़ों को शामिल करे जिसने दो सौ वर्षों तक भारत को गुलाम बना के रखा था . और वह देश अभी टूट्ते टूट्ते बचा है।
अमेरिकन टेलेविज़न की सबसे चर्चित महिला ओप्रा विनफ्रे जब भारत आई थी तो उन्होंने ऐश्वर्या रॉय से साड़ी बांधना सीखा था। ऐसे उदाहरण अनेकों है जो बताते है कि भारत और उसकी जीवन शैली को पश्चिम ने (भले ही फैशन के तौर पर ) अपनाना आरम्भ कर दिया है। परन्तु फिल्मो के मामले में स्थिति अब तक उलट ही रही है।  बरसों से हॉलीवुड फिल्मो से कथानक उठाने का कर्म हमारे फिल्म निर्माता करते रहे है।  एक भी उदाहरण ऐसा नहीं मिलता जहां किसी अमेरिकी स्टूडियो ने हमारी किसी कहानी में दिलचस्पी दिखाई हो।  हाँ हमारी कुछ फिल्मों को उन्होंने  काफी सराहा है। दुनिया के बड़े स्टूडियो पिछले दशक से ही बॉलीवुड में अपनी आमद महसूस कराने का प्रयास करते रहे है। भारत के बड़े बैनरो से उनके समझोते इस बात का उदहारण है।  लेकिन यहां भी कारण दूसरा है।  भारत की विशाल जनसँख्या उन्हें एक बड़े बाजार के रूप में नजर आती है। हालांकि अभी हमारे देश में फिल्मो को लेकर वह संस्कृति विकसित नहीं हुई है जैसी यूरोप और अमेरिका में है।  सालाना सिनेमा टिकिट बिक्री मामले में हम उनसे अभी भी बहुत पीछे है।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ की फिल्मो को लेकर एक रिपोर्ट आई है जिसमे भारत को नारी पात्रों के चित्रण में सबसे बदतर स्थिति में रखा गया है। रिपोर्ट का मानना है की नारी पात्रो को अश्लील , अशालीन , उपभोग की वस्तु , कामुक , दर्शाने के मामले में भारत पहले नंबर पर है।  यहां बनने वाली फिल्मो में से  पैंतीस प्रतिशत फिल्मों में नारी पात्रो को उपरोक्त भूमिकाओं में ही प्रस्तुत किया जाता है।  भारतीय फिल्मों की नारी पात्र कभी कैरियर को लेकर चिंता करती नहीं दिखाई जाती। यह रिपोर्ट उस वर्ग के लिए एक बड़ा प्रश्न है जो नग्नता और सेक्स के लिए पश्चिम की फिल्मों को दोषी ठहराते रहे है।
यूनाइटेड नेशन ने हमारे फिल्मकारों को आईना दिखने का प्रयास किया है , देखना है कितने लोग इस  रिपोर्ट की गंभीरता को समझेंगे ? 
image courtesy google .

Friday, September 19, 2014

story of my friend satyen..मेरे मित्र सत्येन की कहानी

''भेड़िये कानून के नियमों का पालन नहीं करते।  वे कुछ भी कर गुजर  सकते है। भेड़ियों के समाज में किसी बात की  पाबंदी नहीं है . भेड़िया नीति तब ही संकट में आती है जब वे पकडे जाते है ''                                                                                - रिचर्ड केली होस्किन्स

फ़िल्मी दुनिया की चकाचौंध में बहुत से स्याह पहलु अक्सर दबे रह जाते है। इनकी चर्चा भी नहीं होती। पीड़ित शोषित की आप बीती सुनने की फुर्सत कौन निकालेगा भला। आम तौर पर बाहर से देखकर पता नहीं चलता कि कोई सफल व्यक्ति कितने लोगों के हक़ छीन कर शिखर पर पहुंचा है। मेरे एक मित्र( सत्येन ) इन दिनों फिल्म नगरी मुंबई में संघर्षरत है। बहुत  अच्छा लिखते है लिहाजा उन्हें टीवी सीरियल के डायलाग लिखने के अवसर भी मिलते रहते है।  कलात्मकता के साथ उनमे रचनात्मकता(Artistry with creativity ) भी है  जिसकी वजह से उन्हें सेट डिजाइनिंग का मौका भी मिलता रहता है . इस कहानी का सिर्फ यही positive पहलु नहीं है।

सत्येन इन दिनों खासे परेशान है।  परेशानी की वजह पैसा नहीं है।  नाम है। उनसे जो भी काम करवाया जाता है उसका उन्हें पैसा तो मिल जाता है , क्रेडिट नहीं मिलता। उनके लिखे को दूसरे चर्चित लेखक के नाम से पेश कर दिया जाता है। यह समस्या सिर्फ सत्येन की नहीं है न ही अकेले फ़िल्मी दुनिया की है।  लगभग हर क्षेत्र में बड़ी मछली छोटी को निगलने की फिराक में है. ताकत की सत्ता में अक्सर प्रतिभाओ का मरण होता रहा है।
यह एक ऐसी लाइलाज बिमारी है जिससे हरेक कोई पीड़ित है।  हर कोई इससे छुटकारा पाना चाहता है परन्तु समाधान किसी के पास नहीं है।
कुछ वर्षों पूर्व एक टेलीविजन चैनल ने एक स्टिंग ऑपरेशन '' कास्टिंग काउच '' के खिलाफ किया था। युवा लड़कियों और महिलाओं को फिल्म में एक छोटे से रोल के लिए किस हद तक मजबूर किया जाता है यह बात पहली बार घोषित रूप से सामने आई थी। इस धमाके के बाद इस तरह की घटनाए होना निश्चित रूप से बंद नहीं हुई होगी। जरुरत है आवाज उठाने की।  भले ही उससे कुछ हासिल न हो।विरोध तो दर्ज करना ही है।   भेड़ियों के पास यह सन्देश जाना जरुरी है कि भेड़ों ने अब सर झुका कर चलना छोड़ दिया है। 

image courtesy google.

Sunday, September 14, 2014

Death of A wrist watch.......एक हाथ घडी की मौत !!

'' आप  की चाहत के मुन्तजिर है  हम हर पल हर घड़ी '' ( i am  waiting for your love every second every moment ) '' राष्ट्र के समय प्रहरी  '' या '' देश की धड़कन '' (Time keeper of the nation , pulse of the nation ) इन पंक्तियों को पढ़ कर आपको कुछ याद आया ? ये है अस्सी के दशक देश की सबसे बड़ी घडी( watch ) निर्माता कंपनी HMT के विज्ञापन की झलक। वह दौर ऐसा था जब पिता परीक्षा में अव्वल आने पर पुत्र को हाथ घडी दिलाने का वादा करते थे। विवाह लायक लड़कियों की इच्छा हुआ करती थी कि शादी में उन्हें घडी का एक जोड़ा( couple set for both husband and wife ) अवश्य मिले . और थोड़ा पीछे लौटते है तो हमें हाजी मस्तान का नाम सुनाई देता है जिसने अपने जीवन की शुरुआत बंदरगाह पर महज पांच रूपये रोज पर एक कुली के रूप में की थी . यह दौर था जब देश में रेडिओ ,हाथ घडी , परफ्यूम आदि जहाजो में लदकर चोरी छिपे हिन्दुस्तान आया करता था। मस्तान ने इसी व्यवसाय को  बढ़ाया और आगे चलकर इसी मस्तान का रोल अमिताभ बच्चन ने अपनी फिल्म  '' दीवार '' में इतनी शिद्दत से निभाया कि फिल्म कालजयी हो गई।
                                      स्वतंत्रता प्राप्ति  के बाद के दौर में आधुनिक भारत के  निर्माण में जिन उद्योगों पर सरकार की विशेष कृपा रही उनमे एम्बेसडर कार( hindustan motors limited ) के बाद HMT घड़िया ही थी। समय के साथ ताल मेल न बैठाने के क्या परिणाम हो सकते है यह इन दोनों कंपनियों के पतन से ज्ञात होते है।  एम्बेसडर ने पिछले साल अपना उत्पादन बंद किया है और हाल ही में भारत सरकार ने HMT को बंद करने का निर्णय किया है। 247 करोड़ के घाटे के बाद देश की धड़कन कही जाने वाली कंपनी की टिक टिक बंद हो गई जबकि इसकी प्रतिद्वंदी  ''टाइटन ''ने गत वर्ष 1775 करोड़ का व्यवसाय किया है।
                                 परिवर्तन का चक्र कितनी कुर्बानिया लेता है इसका हिसाब रखने की जवाबदारी सिर्फ इतिहास  के पास  है। गत दिनों इस क्षण को सहेजने लिए बैंगलोर में HMT के बिक्री केन्द्रों पर लोगो की भीड़ उमड़ पड़ी।  इतिहास का हिस्सा बनने के लिए लोग  HMT हाथ घड़िया खरीद रहे थे . दूर संचार विभाग ने जब '' टेलीग्राम '' सेवा बंद की थी तब लोग '' तार ' करने के लिए पोस्ट ऑफिस पर टूट पड़े थे। 'हिंदी फिल्मों के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना की मृत्यु पर मीडिया के साथ पूरा देश ग़मगीन हो उठा था।  इतना प्यार उन्हें जीतेजी मिल जाता तो शायद उनकी साँसों को कुछ और वक्त मिल जाता। इत्तेफाक से गोपाल दास नीरज के गीत की पंक्ति याद आरही है -
स्वप्न झरे फूल से
मीत  चुभे  शूल से
लूट गए श्रृंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे ...

Thursday, September 11, 2014

Modern Family ( TV Series )

परिवार किन चीजों से बनता है ? आपके जेहन में तुरंत कुछ बिंदु उभर आयेगे जैसे , त्याग, समर्पण , प्रेम , विश्वास , थोड़ी चुहल बाजी , थोड़ी बेवकूफी , थोड़ी समझदारी , गुस्सा , क्षणिक जलन , ये सारे तत्व एक सफल परिवार में होना जरुरी है।  फिर चाहे वह भारतीय परिवार हो या अमेरिकन। कमोबेश हर देश के परिवारों में ये बाते समान रूप   से पायी जाती रही है। इन्ही तत्वों को ध्यान में रखकर दो अमेरिकन निर्माताओ क्रमश क्रिस्टोफर लॉयड और स्टीवन लेवितान ने एक पारिवारिक टी वी धारावाहिक की कल्पना की और मंथन के बाद जो सामने आया वह था सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी शो '' मॉडर्न फैमिली '' 23 सितम्बर 2009 को ABC टेलेविज़न पर दस्तक देने के बाद हाल ही में इसने पांचवा सीजन संपन्न किया है।
                        एक आम मिडिल क्लास अमेरिकन परिवार कैसा होता है उसकी झलक   'मॉडर्न फैमिली '  में बखूबी दिखाई देती है। निर्माताओ का सोच भी यही था की भले ही कहानी काल्पनिक हो लेकिन पात्र और इनका रहन सहन वास्तविक होना चाहिए।  तीन परियारों के इर्द गिर्द घूमता कथानक ऑउटडोर लोकेशन के दृश्यों में इतना रियल हो जाता है की दर्शक को वह कहानी नहीं वरन डॉक्यूमेंट्री लगने लगता है। इस टी वी सीरियल ने एकऔर  बात को स्थापित किया है कि दूर संचार के बढ़ते साधनो ( means of telecommunications ) ने  लोगो के अंदर दूसरों के प्रति सोंच को बदल कर  रख दिया  है . मोबाइल फ़ोन के अत्यधिक प्रयोग से  लोगों का एक दूसरे के घर आना जाना ख़त्म होगया  है जिस की वजह से मनुष्य अकेलेपन के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है . टेक्नॉलॉजी ने पहला शिकार सामाजिकता का किया है।  परोक्ष रूप से यह सन्देश देने में मॉडर्न फैमिली सफल रहा है।
  
              भारत में टेलीविजन के उदभव के समय दूरदर्शन ने मनोहर श्याम जोशी लिखित '' हम लोग '' का प्रसारण आरम्भ किया था जिसे जबरदस्त लोकप्रियता मिली थी।  आज 30 साल बाद भी  'हम लोग ' लोगों के जेहन में सिर्फ इसलिए है  क्योंकि उसने एक माध्यम वर्गीय परिवार के सपनो और तकलीफों को सपाट लहजे में पेश किया था।
                           मुझे नहीं मालुम कि ' मॉडर्न फैमिली ' के पात्रों ने  'हम लोग' के बारे में कुछ सुना या  नहीं ?  परन्तु दोनों धारावाहिक समय के दो छोर पर खड़े होकर एक ही बात करते प्रतीत होते है कि परिवार समाज की एक महत्त्व पूर्ण इकाई है और इसका बिखरना समाज के बिखराव की शुरुआत है।
( मॉडर्न फैमिली के हिस्से  में इस हफ्ते एक और उपलब्धि जुडी है।  इस धारावाहिक की प्रमुख पात्र कोलम्बियाई  मूल की अभिनेत्री सोफ़िया वेरगारा स्क्रीन नाम ग्लोरिया प्रिशेत् फ़ोर्ब्स पत्रिका के अनुसार लगातार तीसरे वर्ष टेलीविजन पर सर्वाधिक कमाई करने वाली एक्टर बनी है। सोफ़िया प्रति एपिसोड 3.25 लाख डॉलर मेहनताना लेती है )
           

Friday, September 5, 2014

learn english ..

मेरे बहुत से मित्रों की राय थी कि में उन्हें अंग्रेजी सिखने  बोलने  के कुछ आसान से टिप्स सुझाउ। पचासों टिप्स में से मेने  जरुरी बिंदु एकत्र किये है।  बस आवश्यकता है उन्हें नियम से अपनाने की।


The following tips helped me improve my pronunciations  and overcome my hesitation in the language. Hope they are useful for you too.
  • Don’t worry about making mistakes because you will make mistakes as a learner.
    गलतियां होने की चिंता मत  करो क्योंकि सिखने के दौरान आप कई गलतिया  करोगे ही। 
  • Be patient. This isn’t a one day process.
    धीरज रखो। सीखना एक दिन की प्रक्रिया नहीं है।

  • Learn certain phrases that can be used in multiple situations.
    कुछ ऐसे वाक्यों  रट लेवे जिन्हे आप अलग अलग परिस्तिथियों में उपयोग कर सके ।

  • Learn how to greet someone properly.
    अंग्रेजी में किसी को भी ठीक  तरह से अभिवादन करना सीख लेवे।

  • Talk slowly and carefully. Don’t rush through your sentences.
    धीमे और ध्यान पूर्वक बाते करे।  जल्दी जल्दी न बोले।

  • Restrict yourself to simple sentences until you gain confidence.
    जब तक आत्म विश्वास न आजाये तब तक साधारण वाक्यों  तक अपने आप को सीमित  रखे।

  • Watch out for your  pronunciations Many online tools will tell you how to pronounce a word correctly. Check one of them out when you’re in doubt.
    अपने उच्चारण पर ध्यान दे। इंटरनेट पर ऐसे कई टूल्स है जो बोलने में आपकी मदद कर सकते है। जब भी संदेह हो उनकी मदद ले


  • Carefully observe how proficient speakers of the language pronounce words and frame their sentences.
  • अंग्रेजी बोलने वाले की और ध्यान से देखे वे किस तरह से वाक्य बनाते है और किस शब्द को कैसे उच्चारित करते है।

  • Ask your friends, relatives and anyone you can to point out your mistakes and correct them.
    अपने दोस्तों रिश्तेदारों को कहे कि वे आपकी गलतियों को बताये।

  • Speak to them in English only. Practice is a must.
    उनसे अंग्रेजी में ही बात करे।  अभ्यास आवश्यक है।

  • Record yourself reading one article aloud every day. Focus on pronunciation, speed, clarity and emphasis.
    अंग्रेजी के किसी आलेख को ऊँची आवाज में पढ़े। ध्यान केंद्रित करे उच्चारण , स्पस्टता , और रफ़्तार पर।

  • Learn at least one new word every day and use it as a part of your conversation with people. By the end of the week, you should know seven words really well.
    रोजाना एक नया शब्द अवश्य याद करे।  लोगों के साथ बातचीत में उसे दोहराये। सप्ताह के अंत में आप सात शब्द भली भांति सीख जायेगे।



  • Read at least one article of your choice aloud every day.
    अपनी पसंद का कम से कम एक लेख ऊँची आवाज में प्रतिदिन पढ़े।

  • Watch English movies with subtitles.
  • उप शीर्षकों वाली अंग्रेजी फिल्मे देखे।

  • Watch English shows.
  • अंग्रेजी के टीवी कार्यक्रम देखे। 

  • Read books and magazines.
  • अंग्रेजी की पत्रिकाऍ और किताबे पढ़े।

  • When you hear a new word, try to find its usage and its antonyms.
  • जब भी नया शब्द सुने उसका उपयोग और विलोम ढूंढने का प्रयास करे।


    Best of luck!

मास्को फिल्मोत्सव में बाहुबली

घर बैठे किसी भी देश को समझने का सबसे आसान तरीका है उस देश का साहित्य पढ़ना या फिल्मे देखना।  आजादी के तुरंत बाद जिस देश ने हमारा ह...