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Sunday, November 5, 2017

परछाइयों की आत्मकथा

आत्मकथा - किताबो की एक ऐसी श्रेणी है जिसके तलबगार कम है परंतु कोई आत्मकथा अगर हंगामा बरपा दे तो सभी का ध्यान उसकी और चला जाता हैं । विवाद की एक चिंगारी लेखक और प्रकाशक को मालामाल कर देती हैं । यद्यपि बहुत कम आत्मकथाएँ  इतने नसीब वाली होती है जिन्हें पाठक सर माथे पर बिठाते है अन्यथा वे कब आती है और कब चली जाती है , पता नही चलता । डॉ कलाम या स्टीव जॉब्स ऐसे लोग है जिनके बारे मे लोग हमेशा पढ़ना चाहते है । सफलता के अनजान अंधेरे रास्तो  पर इन किताबो ने कईयों के जीवन मे लाइट हाउस की भूमिका निभाई है । 
सिने प्रेमियों को अभिनेताओं की आत्मकथा सदैव लुभाती है । राजनेताओं की आत्मकथाओं की तरह यह  भी पढ़ने वालों में खासी दिलचस्पी जगातीहै । इन आत्मकथाओं में काफी अनसुना ,अनदेखा मिलने की संभावना बनी रहती हैं । गुजरे समय मे कुछ आत्मकथाओ ने अपने आने से पहले काफी उम्मीद जगायी थी । दिलीप कुमार की उदय तारा नायर लिखित आत्मकथा ' द सब्सटेंस एंड शैडो ' ऐसी ही थी जो ट्रेजेडी किंग के प्रशंसकों को निराश कर गई ।दिलीप कुमार की नायिकाये , समकालीन अभिनेताओं से उनकी होड़ , राजकपूर , देव आनंद से  पेशेवर गैर पेशेवर संबंध। मधुबाला से प्रेम फिर विवाह की मनुहार और अदालत में संबंधों का पटाक्षेप जैसी ढेर सारी  बाते है जो सर्वविदित है परन्तु उनके प्रशंसक उनकी ही जुबानी सुनना चाहते थे लेकिन दिलीप की बहु प्रतीक्षित आत्मकथा से नदारद थी।  फ़िल्म  ' शायद ' से अपने कैरियर की सुरुआत करने वाले ओम पुरी की आत्मकथा उनकी दूसरी पत्नी ने इस विवादास्पद ढंग से लिखी कि इस महान एक्टर को कोर्ट की शरण लेना पड़ी ।  '' द
अनलाइकली हीरो '' नाम से ही आभास दिलाती है कि इस किताब में ओमपुरी के उन लम्हों की दास्तान है जो वे कभी सामने नहीं लाने वाले थे। साल में एक दो बार कोई न कोई पत्रकार अमिताभ बच्चन से पूछ ही बैठता है कि सर आप कब अपने संस्मरण लिख रहे है ? हमेशा की तरह महानायक विनम्र होकर बात घुमा देते है।   सिने प्रेमियों की स्मृति में जुम्मे जुम्मे जगह बनाने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी की हालिया आत्मकथा कुछ जल्दी ही आगई । नवाज की स्क्रीन परफॉर्मेंस की जितनी तारीफ की जाए , कम है। इस धुरंधर अभिनेता ने ऋतुपर्णो चटर्जी लिखित अपनी आत्मकथा में अपनी सहाभिनेत्रियो पर इतनी हल्की टिप्पणियों कर दी कि बवाल हो गया । अच्छा एक्टर अच्छा इंसान भी हो इस बात पर प्रश्नचिन्ह लग गया । नवाज की आत्मकथा बाजार से हटा ली गई है । 
मोजूदा दौर व्यक्तित्व के विखंडन का दौर है । जो खरा दिखता है जरूरी नहीं खरा हो भी । बाजार ने नैतिकता की हदें तय कर दी है । दर्शक और सिनेमा के तलबगारों के लिए अपने आदर्श निश्चित करने से पहले तोल मोल करना जरूरी हो गया है।

Friday, June 27, 2014

Biography of an extraordinary man

'' All of us face hard choices in our lives''  हम सभी अपने जीवन में  कठिन विकल्पों का सामना करते है - कहते हुए श्रीमती हिलेरी क्लिंटन ने अपने चार साला कार्यकाल ( अमेरिकी विदेश मंत्री ) की स्मृतियों को एक किताब की शक्ल  दी है। ' हार्ड चोइसेस ' ( HARD CHOICES ). किताब उनकी आत्मकथा नहीं कही जा सकती , अगर वे आत्मकथा लिखती तो निश्चित तौर पर कुछ खंड उनके पति , पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को लेकर भी होते , अमेरिकी मीडिया का मानना है कि यह किताब उनके अगला  राष्ट्रपति  चुनाव लड़ने की  तैयारियों का आगाज है। और ऐसे में भला वे क्यों कर बिल  क्लिंटन की परछाइयों को गले लगाएगी ?
बहरहाल मीडिया ने उनकी किताब को भरपूर सकारात्मक बताया है।
 अवाम को अफसानों  और हकीकत का फर्क मालूम है।  हकीकत ,  भले ही वह फिर कितने ही आवरण में सामने आये , उसके लिए लोग अखबार का इन्तजार करते है।  परन्तु भोगे यथार्थ  की कहानियाँ सदेव उत्सुकता जगाती है , इसलिए किताबो का सहारा लेना जरुरी हो जाता है . अखबार तो कल को रद्दी की भेंट चढ़ जाएगा।  किताबे पीढ़ियां के काम आएगी।

इसी माह अभिनय सम्राट दिलीप कुमार पर उनकी पत्नी ने उदय तारा नायर के सहयोग से आत्म कथा '' SUBSTANCES AND SHADOW '' जारी की है। उल्लेखनीय है कि दिलीप कुमार पर अब तक चार किताबे आ चुकी है। निसंदेह उदय तारा ने बहुत अच्छा  लिखा है परन्तु दिलीप कुमार स्वयं अपने मन की गाँठ खोलते  तो बेहतर होता। पुरुस्कारों और प्रोत्साहनों से लदे उनके साठ  साल के फ़िल्मी सफर की दास्तान उनकी ही जुबानी सुनना हरेक फिल्म प्रेमी की कामना थी। परदे पर जो कुछ घटा वह तो सर्वव्याप्त हो गया  . परन्तु  परदे के पीछे उनके समकालीन, उनकी आसमानी सुंदरता से लबरेज नायिकाए , उनका जूनून , ईर्ष्या , होड़ , सब कुछ अनकहा रह गया  है।   फिल्म के हरेक फ्रेम को जीवंत कर देने वाले मुखर कलाकार का यूँ अपने जीवन की शाम में स्मृति शुन्य हो जाना एक बड़ी त्रासदी है।



दिस इस नॉट अ पोलिटिकल पोस्ट

शेयर बाजार की उथल पुथल में सबसे ज्यादा नुकसान अपने  मुकेश सेठ को हुआ है। अरबपतियों की फेहरिस्त में अब वे इक्कीसवे नंबर पर चले गए है। यद्ध...