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Thursday, May 18, 2017

जिंदगी न मिलेगी दोबारा !!




प्रिय असमय विदा लेने वालों 
किसी को तो आपसे बात करनी ही थी तो सोंचा कि क्यों न में ही पहल करूँ। आप मेरे कुछ भी नहीं लगते।  न ही हमारी कोई जान पहचान है। परन्तु लगभग  रोजाना ही आपके बारे में हर अखबार में जिक्र होता है। कभी पहले पन्ने पर तो कभी आंचलिक समाचारों में तो कभी टीवी स्क्रीन पर। बुरी तरह बर्बाद हो चुकी गाड़िया , खून से लथपथ शरीर , आसपास खड़े तमाशबीन,  यह हरेक समाचार पत्र में छपने वाले फोटो का विषय होता है। अक्सर ये बाते मुझे झकझोर देती है। मुझे हैरानी होती है कि वे लोग किस मानसिकता के होते है जो आपके शवों के फोटो सोशल मीडिया पर डाल देते है। संवेदन शून्यता की पराकाष्ठा  कह सकते है । सड़क दुर्घटनाओं पर रोज एक नई स्टोरी होती है। कभी कभी अपने को  दोहराती या भयानकतम या सिहरा देने वाली। इंटरनेट पर बिखरे आंकड़े हिला कर रख देते है। देश की सीमाओं पर जवान सुरक्षित नहीं  है और मार्गों पर नागरिक। प्रतिदिन देश की सड़के 408 जिंदगियां ख़त्म कर देती है। सालाना यह जोड़ ढेड़ लाख पर पहुँचता है और पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। ख़बरों की  दुनिया में सबसे महत्वहीन खबर सड़क दुर्घटनाओं की ही होती है कि इनका फ़ॉलोअप नहीं होता। कभी कोई संवाददाता यह जानने की कोशिश नहीं करता कि घटना के बाद पीड़ित के परिवार पर क्या गुजर रही है। 
विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार हमारा देश सड़क सुरक्षा के नाम पर   निचली पायदान पर है और सड़कों पर जोखिम के मामले में शीर्ष पर। कहने को स्मार्ट शहरों की बात हो रही है परन्तु राजमार्गों पर जिंदगियां  दम तोड़ रही है। अस्पताल इतने निढाल है कि एन वक्त पर  आपात कालिन परिस्तिथियों  संभाल नहीं पाते। अक्सर कस्बे से जिला अस्पताल ले जाने की कवायद में पीड़ित जिंदगी से हार जाता है। यह दिलचस्प तथ्य है कि वाहन घनत्व के लिहाज से देश में सम्पूर्ण दुनिया के मात्र  '' चार '' प्रतिशत वाहन है। इसे इस तरह भी समझा जा सकता है। ईरान में प्रति एक हजार लोगों पर 175 वाहन है , जापान में 525 , जर्मनी में 695 , ब्रिटेन में 732 , अमेरिका में 912 और हमारे देश में मात्रा 18 वाहन। ऊपरोक्त सभी देशों में दुर्घटनाओं में मृतकों  की संख्या लगभग शून्य है या इसके करीब है।   
अफ़सोस की बात है , सड़को पर मौत का पहला पुरूस्कार हमें कई वर्षों से लगातार मिल रहा है। आने वाले और कितने वर्षों तक यह हमें मिलता रहेगा ? इसे लेकर भी कोई दुविधा  नहीं है। आप लोग अब लौट नहीं सकते परन्तु जो अभी भी सड़कों का उपयोग कर रहे है , उनके लिए मेरी शुभकामनाये  वे भरपूर जीवन जिये । खुद भी सुरक्षित रहे और दूसरों को भी सुरक्षित रखे। याद रहे ! प्रायश्चित के लिए जिंदगी न मिलेगी दोबारा। 

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