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Friday, November 25, 2016

A movie scene become reality : एक सीन का सच होना !!

एक काल्पनिक द्रश्य हकीकत में बदल गया। ऐसा कम ही होता है। जैसा इस बार  हुआ  शायद पहले कभी घटित  नहीं हुआ हो। हॉलीवुड एक्टर टॉम हेंक की कई यादगार फिल्मों में से एक Forest Gump (1994 ) का एक द्रश्य 22 नवंबर 2016 को सजीव हो उठा। इस फिल्म में टॉम ( स्क्रीन नाम -फारेस्ट गंप ) वियतनाम युद्ध से लौटते है और प्रेसिडेंट जॉनसन  'व्हाइट हाउस ' में उन्हें हीरो का सम्मान देकर मैडल पहनाते है।
22 नवंबर को राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 21 अमेरिकियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान '' प्रेसिडेंटशियल मैडल ऑफ़ फ्रीडम ''से नवाजा। इन लोगों में बिल गेट्स , माइकेल जॉर्डन,रोबर्ट डी नीरो , और एलेन डी जेनेरेस के साथ टॉम हेंक भी थे।
 ये दो फोटो वास्तविक और आभासी दुनिया का अंतर मिटा देते है।
 फिल्मे फंतासियां रचती  है , फिल्मे शायद भविष्यवाणियां भी करती है !!  

Thursday, October 13, 2016

Rain man ( 1988) रिश्तो को खोजती फिल्म

यूँ तो कोई भी पूर्ण नहीं होता। थोड़ी बहुत कमी लगभग सभी में होती है। आमतौर पर सामान्य दिखने वाला व्यक्ति कितनी विकृतिया साथ लिए घूम रहा होता है , एकदम से  पता नहीं चलता। परंतु दुर्भाग्यवश कुछ
 लोग ऐसे  भी होते है जो जन्म से ही कुछ मानसिक कमियों के साथ धरती पर आते है।  इन्हें सारी  उम्र किसी न किसी पर निर्भर रहना पड़ता है। नब्बे फ़ीसदी मामलों में इन लोगों को सहारा परिवार ही देता परंतु सामाजिक स्तर पर इन्हें बराबरी का सम्मान नहीं मिलता।
इस ब्लॉग में  में आज जिस फिल्म की बात करने जा रहा हु उसका नायक savant syndrome से पीड़ित है। इस पात्र को निभाने वाले एक्टर Dustin Hoffman ने भूमिका को इतनी संवेदनशीलता से जिया था कि महज 100  दिनों में इस तरह की बीमारी या मानसिक मंदबुद्धि को लेकर इतनी जागरूकता आ  गई जितनी 101 साल में नहीं हो  पाई थी।

चार्ली बेबीट ( टॉम क्रूज ) लॉस एंजेल्स में एक ऑटोमोबाइल सेल्समेन है। स्वभाव से स्वार्थी और थोड़ा लालची भी। उसके पिता अपनी वसीयत में  उसके नाम चालू हालात में  एक पॉकेट वाच और 1949 मॉडल की  ब्यूक रोडमास्टर कार छोड़ गए है। उसका गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच जाता है जब उसे मालुम पड़ता कि वे  3 मिलियन डॉलर का खजाना उसके बड़े मंदबुद्धि भाई रेमंड के नाम कर गए है जो इस समय एक सैनेटोरियम में दुनियाई हकीकत से अनजान जीवन बिता रहा है। चार्ली अपने बड़े भाई का अपहरण कर लेता है ताकि खुद को रेमंड का लीगल गार्जियन बनाकर पैसा हड़प  सके।
रेमंड जिस मनोदशा से गुजर रहा है उसके कुछ अच्छे पहलु भी है। उसकी याददाश्त कमाल की है। वह सिनसिनाटी की टेलीफोन डायरेक्टरी A से G तक एक रात में कंठस्थ कर लेता है। मैथ्स का बड़ा से बड़ा सम वह बगैर देखे बोल देता है। चार्ली अपने लालच के लिए  उसे ताश का खेल ब्लैक जैक सीखा देता जिससे वह लॉस वेगास में काफी कमाई कर लेता है।   रेमंड और चार्ली सड़क मार्ग से सिनसिनाटी से लॉस एंजेल्स की यात्रा करते है क्योंकि रेमंड को प्लेन में सवार होने से डर लगता है।  चार्ली को विरासत में मिली रोडमास्टर कार से यह सफर 6 दिन में पूरा होता है क्योंकि रेमंड रात में और बारिश में सफर करने से मना कर देता है। यह
रोड ट्रिप चार्ली को बदल देती है। चार्ली महसूस करता है कि उसे अपने भाई को कुछ सिखाना चाहिए परंतु वह पाता है कि रेमंड ' स्पेशल ' है।आटिज्म ने जो दिवार उसके सामने कड़ी की थी वह दरकने लगती है साथ ही चार्ली जिस स्वार्थ और लालच की दिवार में कैद था वह भी ढह जाती है रेमंड भावनाएं और स्नेह समझने लगता।लेकिन बचपन की कुछ कड़वी स्मृतियों की वजह से उसे दौरे पड़ते रहते है।  चार्ली को मालूम होता है कि उसकी तरह रेमंड को भी ' बीटल्स ' पसंद है। लॉस एंजेल्स में एक डॉक्टर चार्ली को ढाई लाख डॉलर लेकर रेमंड को हमेशा के लिए भूलने की पेशकश करता है परंतु चार्ली  ऑफर को ठुकरा देता है। अब उसे अपने पिता से भी कोई शिकायत नहीं है।  वह अपने भाई की खुद देखभाल करना चाहता है. वह रेमंड से प्यार करने लगा  परंतु रेमंड तय नहीं कर पाता कि वह चार्ली के साथ रहे या सेनेटोरियम लौट जाए। चार्ली रेमंड को सेनेटोरियम  लौट जाने देता है।
टॉम क्रूस इस फिल्म के केंद्र में है  परंतु डस्टिन हॉफमैन का चरित्र इस फिल्म की जान है  । 1988 की इस न भुलाये जाने वाली फिल्म ने चार ऑस्कर अवार्ड हासिल किये थे।

Friday, September 30, 2016

Rear window (1954) :पिछवाड़े की खिड़की :


' सस्पेंस ' शब्द जेहन में आते ही जो नाम हमारी स्मृति में कौंधता है  वह बिलाशक ' अल्फ्रेड हिचकाक ' (Sir Alfred Joseph Hitchcock ) का होता है ।  पांच दशक में फैले इस प्रतिभाशाली और प्रभावशाली फ़िल्मकार का कॅरियर सिने जगत को रहस्य रोमांच और मनोवैज्ञानिक भय से रूबरू कराते हुए आज भी अपना आकर्षण बनाये हुए है। सस्पेंस को केंद्र में  रखकर हिचकॉक के पहले भी  कई फिल्मे बनी परंतु ' चिंता ' भय ' रहस्य ' और बेचारगी  को जितनी ऊंचाई पर हिचकॉक लेकर गए उतनी जोखिम किसी ने नहीं उठायी । केमेरे का एंगल , फिल्म की एडिटिंग, चोंकाने वाला एन्डिंग - दुनिया भर के फिल्मकारों ने हिचकॉक के  इन नायाब नुस्खों को बखूबी अपनाया।  आज भी कई विनम्र डायरेक्टर अपने आप को हिचकॉक स्कूल का स्टूडेंट मानने में  गर्व महसूस करते है।हिचकॉक का फ़िल्मी सफर ब्रिटेनसे लेकर अमेरिका तक फैला हुआ है। इस सब्जी विक्रेता के बेटे  ने साइलेंट फिल्मो के दौर से फिल्म मेकिंग की शुरुआत की थी और उस दौरान बनी बीस से अधिक फिल्मे आज भी  ब्रिटिश फिल्म इंस्टिट्यूट की बेशकीमती धरोहर मानी जाती है। दौर कोई सा भी रहा हो , हिचकॉक ने अपना पसंदीदा सब्जेक्ट '  हॉरर ' और ' सस्पेंस ' कभी नहीं  छोड़ा। यहाँ तक की कि उनकी बनाई कॉमेडी और रोमांटिक फिल्मों में भी  सस्पेंस का तड़का जरूर होता था। यही वजह है कि उनके नाम के साथ आज भी The Master of Suspense की उपाधि  अवश्य लगाईं जाती है। हिचकॉक ने तकरीबन 60 से अधिक फिल्मो को प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया। उनकी हरेक फिल्म में उनका  ' कैमियो  अपीयरेंस ' जरूर होता था।  यह ऐसी सिग्नेचर  स्टाइल थी जिसे आज तक  कॉपी किया जा रहा है।
1954 में हिचकॉक ' रियर विंडो ' ( Rear Window ) लेकर आये।  यह उनकी दस सर्वक्षेष्ठ फिल्मों में शीर्ष स्थान पाने वाली फिल्म मानी जाती है। इस सस्पेंस मिस्ट्री थ्रिलर का आईडिया उन्हें 1942 में एक जासूसी लघु कथा से मिला था। फिल्म का नायक जेफ(james stewart)  एक प्रॉफेश्नल फोटोग्राफर है जो एक दुर्घटना में टांग तुड़वा बैठा है। पैर में प्लास्टर चढ़ा होने से उसकी जिंदगी कुछ दिनों के लिए व्हील चेयर में सिमट गई है। सुन्दर सलोनी लिसा( Grace kelly) उसकी प्रेमिका है जो अक्सर उसके अपार्टमेंट पर आती रहती है।
जेफ़ समय बिताने के लिए अपने अपार्टमेंट के पीछे बने पांच मंजिला अपार्टमेंट ब्लॉक के फ्लैटों में  अपने पावरफुल कैमरे से  ताक झांक करता है।  इसी दौरान उसे समझ में आता है कि सामने वाले फ्लैट कोई बड़ा अपराध हुआ है। सस्पेंस और नाटकीय घटनाओ के बाद लिसा और जेफ उस अपराधी को कानून के शिकंजे में पहुंचा देते है। हिचकॉक ने इस साधारण सी कहानी में  तीव्र उत्तेजना पैदा की है। दर्शक की कल्पना से परे  पात्रों का डिटेल सारी कहानी समझाता चलता है। सम्पूर्ण फिल्म एक ही अपार्टमेंट में ख़त्म होती है परंतु घटनाओ और दृश्य की तीव्रता दर्शक को बांधे रखती है। हिचकॉक ने पूरी फिल्म पेरामाउंट स्टूडियो में विशाल सेट लगाकर शूट की थी। आज साठ साल बाद भी फिल्म दर्शक को सोंचने का मौका नहीं देती। यह हिचकॉक का मैजिक ही था जिसने फिल्म को कालजयी बना दिया है।



दिस इस नॉट अ पोलिटिकल पोस्ट

शेयर बाजार की उथल पुथल में सबसे ज्यादा नुकसान अपने  मुकेश सेठ को हुआ है। अरबपतियों की फेहरिस्त में अब वे इक्कीसवे नंबर पर चले गए है। यद्ध...