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Saturday, March 18, 2017

बुरके में लिपस्टिक



' जब खुला आसमान आँगन में झांकता हो तो खिड़कियों पर कितने ही मोटे  परदे लगा दो , उजाला कमरे में प्रवेश कर ही जाएगा '' ऐसी ही हिमाकत भारतीय सेंसर बोर्ड इन दिनों कर रहा है। समाज के सांस्कृतिक उत्थान की जितनी चिंता सेंसर बोर्ड को है उतनी शायद किसी को भी नहीं है। ' हर - हर  मोदी , घर -घर मोदी ' का नारा देने वाले पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड चेयरमैन का पद इस एक नारे की बदौलत मिला है।  तभी से वे हर फिल्म को सर्टिफिकेट देने में विवादों में घिरते आये है। निहलानी साहब का मानना है कि भारतीय संस्कृति का बचाव करना उनकी जिम्मेदारी है , जिसे फिल्मे दूषित कर रही है।  वे इस तथ्य को भूल जाते है कि  ' कामसूत्र ' भारत में ही लिखा गया है और खजुराहों के शिल्प भी हमारे ही किन्ही पूर्वजों के हाथ से ही तराशे गए थे। बावजूद इसके हमारी संस्कृति असहिष्णु रही है। 
पिछले दो सालों में बहुत सी फिल्मों को सेंसर बोर्ड के नश्तर का शिकार होना पड़ा है।  इसमें  ग्लोबल अपील  वाली जेम्स बांड की फिल्म ' स्काई फाल ' भी शामिल है। ' गंगा जल ' अपहरण ' आरक्षण ' और ' राजनीती ' जैसी फिल्मे प्रोड्यूस करने वाले प्रकाश झा की ताजा फिल्म ' लिपस्टिक अंडर माय बुरक़ा ' इन दिनों सेंसर बोर्ड में अटकी पड़ी है। टोक्यो और मुम्बई फिल्म फेस्टिवल में यह फिल्म पुरूस्कार जीत चुकी है और अंतराष्ट्रीय स्तर पर सराही जा रही है।  भोपाल की चार महिलाओं के जीवन पर आधारित इस फिल्म को निर्देशित भी एक महिला - अलंकृता श्रीवास्तव ने किया है।  स्क्रीनिंग कमेटी  का मानना है कि फिल्म की विषय वस्तु काफी ' बोल्ड ' है और डायलॉग भी अश्लील है। निहलानी साहब का सोच है कि भारतीय नारी की ' फंतासी ' इतनी उड़ान नहीं भर सकती जितनी इसके पात्र दर्शाते है। गौर करने लायक तथ्य है कि देश के 35 प्रतिशत मोबाइल धारी इंटरनेट से जुड़े हुए है और महज एक ' क्लिक ' से  पोर्न की दुनिया में प्रवेश करने में सक्षम है। यही नहीं , अमेरिकन टेलीविज़न के सर्वाधिक चर्चित टीवी शो ' गेम ऑफ़ थ्रोन ' ब्रेकिंग बेड ' टू एंड हाफ मैन '(सेक्स , हिंसा , नग्नता , से लबरेज ) पाइरेटेड साइट्स पर आसानी से डाउनलोड हो कर देखे जा रहे है।   
इंटरनेट  खुले आसमान से हँमारे घरों में झाँक रहा है और हम ब्रिटिश कालीन सेंसर बोर्ड से संस्कृति की रक्षा कर रहे है। यह डबल स्टैण्डर्ड हमें कहीं नहीं ले जाएगा। 

Sunday, May 1, 2016

The Land of Kamsutra : खजुराहो के देश में सेंसर !!

एक खुला पत्र सेंसर बोर्ड के चेयर मैन के नाम 

आदरणीय पहलाज निहलानी साहब

सादर प्रणाम ,
       
     एक गुमनाम  फिल्म निर्माता से सेंसर बोर्ड के चेयरमैन बनने और दुनिया भर में अपने नाम का डंका बजाने के लिए बधाई स्वीकार करे। जब से आप इस कुर्सी पर बैठे है तब से दुनिया के नामचिन निर्माता निर्देशकों ने भारत की तरफ पैर करके सोना भी बंद कर दिया है। खुश तो बहुत होंगे  आप कि जो त्राहि आपने मचाई है और  ' संस्कार व संस्कृति ' के लिए फिल्म के दृश्यों पर बेरहमी से कैंची चलाई वैसा साहस किसी और ने पहले नहीं दिखाया। परन्तु सर , देश को इसकी बड़ी किमत चुकाना पड  रही है।  कैसे ?  मैं विस्तार से बताता हूँ  .
                     हाल  ही में मैं huffingtonpost.com पर एक लेख पढ़ रहा था। शीर्षक था '' बेतुके कारणों की वजह से सेंसर बोर्ड ने हॉलीवुड की 6 फिल्मों को सर्टिफिकेट देने से इंकार किया '' ...  बुरा मत मानियेगा सर।  ये 6 फिल्में आज भी torrent  की बदौलत धड्ड्ले से भारत में देखीं  और share की जारही है।  आपने तो उन्हें सिनेमा घर का मुंह न देखने दिया परन्तु आप उन्हें रोक नहीं पाये।  ये सभी फिल्में ख्यातनाम actors और directors की है और एक को तो oscar भी मिल चूका है। यही हाल टेलीविज़न shows का हो रहा है। Two and half man , Breaking Bad , Games of throne जैसे लोकप्रिय धारावाहिक आपके होते शायद भारत में प्रदर्शित न हो पाये परन्तु देखे जा चुके है , बगैर किसी mute के , बगैर किसी beep beep के साउंड के। उस revenue की कल्पना कीजिये जो indian film industry कमा न सकी. आपको तो सिगरेट , शराब,  और हिंसक दृश्यों से देश को बचाना था आपने बचा लिया।   खैर।
                          पिछले दिनों केंद्र सरकार ने चुनिंदा पोर्न साइट्स पर बैन लगाकर देख लिया है। मीडिया में इतना मजाक बना आपने भी सुना होगा। यू टर्न लेना पड़ा।
            सर , गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की ' गीतांजलि ' में कुछ लाइन बताती है कि पिछले पांच हजार वर्षों में हमारे इस भू भाग पर अनगिनत सभ्यताए आई परन्तु हमारी संस्कृति को नष्ट न कर सकी वरन वे अपना अस्तित्व खो कर भारतीयता में इस कदर घुलमिल गई जैसे यहीं की हो।
                 जिद छोडिए सर ! लोग जो देखना चाहते है उन्हें देखने दीजिये।  आप अपनी और से ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर सकते है जैसा कि अमेरिकन और ब्रिटिश फिल्मों के लिए होता है। ध्यान रखिये सर  श्रीमती इंदिरा गांधी जैसी पावरफुल प्रधानमंत्री भी इमरजेंसी को ज्यादा नहीं थोप पाई थी। उनका राजनीतिक हश्र भी आपकी स्मृति में होगा ही।
 हमारे देश में एक अलिखित नियम है कि आप कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को राय नहीं दे सकते , उसका आत्म सम्मान आहात हो जाता है।  में आपको राय नहीं दे सकता सिर्फ आगाह कर सकता हु। कला के किसी भी रूप को प्रतिबंधित करना संभव नहीं है। प्रतिबंध अपने साथ विकृतियां लाते है ( गूगल के मुताबिक़ इस्लामिक राष्ट्र का दम भरने वाला पकिस्तान पोर्न सर्च में दुनिया में पहले स्थान पर आता है )
याद रखिये सर  - कामसूत्र भारत  की  देन है  और खजुराहो के शिल्प हमारे ही पूर्वजों ने तराशे थे। यह बात देश के कर्णधार गर्व से बताते है !!

                  

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