Wednesday, August 27, 2014

The man who made GANDHI : वह शख्स जिसने गांधी को बनाया

1993 में आई फिल्म  जुरासिक पार्क  को  भला कौन भूल सकता है। इस फिल्म स्मरण करते ही हमारे जेहन में खूंखार डायनासौर उभर आते है और उभर आता है इस फिल्म का केंद्रीय पात्र - सफ़ेद कपड़ों में नफासत से छड़ी टेक कर चलता ठिगना सा अहंकारी अरबपति बूढ़ा , जॉन हेमांड , जुरासिक पार्क का मालिक। ये शख्स थे सर रिचर्ड एटनबरो जो अपने 91 वे जन्मदिन से  पहले (24 अगस्त ) दुनिया  को अलविदा कह गए।
                                 सर रिचर्ड एटनबरो का भारत से काफी पुराना नाता रहा है। 1963 में उन्होंने अपनी फिल्म की पटकथा नेहरूजी को दिखाई थी परन्तु कुछ बात नहीं बनी। 1977  में वे सत्यजीत रे की फिल्म  'शतरंज के खिलाड़ी ' में एक क्रूर जनरल ओट्रम के रूप में नजर आये . मात्र 12 वर्ष की उम्र में अपना फ़िल्मी सफर आरम्भ करने वाले सर रिचर्ड की फिल्मों और मिले सम्मानों का जिक्र करने लिए यह ब्लॉग बहुत छोटा है। मगर एक फिल्म जिसने उन्हें अमर कर दिया वह थी '' गांधी ''. 1982 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने पिता पंडित नेहरू का वादा निभाया और एटनबरो को फिल्म बनाने की अनुमति प्रदान की। बीस वर्षों की मेहनत  का परिणाम यह था की फिल्म का हरेक पात्र इस तरह सामने आया जैसे वह  गांधी युग से ही चलकर आरहा हो। इस फिल्म के रीलिज होते ही युवा पीढ़ी के साथ सारी दुनिया ने एक बार पुनः गांधी के विचारों को जाना। गांधी फिल्म को आठ ऑस्कर अवार्ड मिले और भारत सरकार ने 1983 में सर रिचर्ड एटनबरो को पदम भूषण  नवाजा।
                             इतिहास का यह अजीब संयोग है की जिस ब्रिटिश साम्राज्य को महात्मा गांधी ने उखाड़ फेंका उसी ब्रिटिश कौम के एक नागरिक ने उनपर कालजयी फिल्म बनाकर अपनी आदरांजलि अर्पित की। अगर आपने यह फिल्म अब तक नहीं देखी तो सारे काम छोड़ कर अवश्य ही देखे। 

Monday, August 25, 2014

आज की ताजा खबर



ये आकाशवाणी है. , बुधवार की शाम है और और आपका दोस्त अमीन सयानी हाजिर है बिनाका गीतमाला लेकर, अब प्रस्तुत है फौजी भाइयों का फर्माइशी कार्यक्रम जयमाला , इस समय रात के नौ बजे है प्रस्तुत है हवा महल , ये जुमले आज कितने लोगो को याद है ? चालीस पार के  लोगों को रेडियों की यह प्रस्तुतियाँ अवश्य याद   होगी। परन्तु बीस -पच्चीस आयु वर्ग के लिए यह शब्द गए गुजरे जमाने की बात है।
अस्सी के दशक में टेलीविजन के   उदभव  और नब्बे के दशक में सेटे लाइट चैनलों की बारिश ने रेडियो को पहले ड्राइंग रूम से बाहर किया और फिर घर से रुखसत किया। उस दौर में लोगों की दिनचर्या आकाशवाणी के सुबह के समाचारों से बंधी होती थी। समाचारों के पहले बजने वाली बीप - बीप की ध्वनि घडी मिलाने का जरिया हुआ करती थी। दस मिनिट के हिंदी समाचारों के ठीक  बाद अंग्रेजी समाचार ( हूबहू अनुवाद ) अंग्रेजी सीखने की मुफ्त कोचिंग हुआ करता था। देवकी नंदन पांडे , इला भट्ट , बरुण हलधर , मेलवेल डिमेलो  स्टार समाचार वाचक  थे। यही हाल रेडिओ सीलोन का हुआ करता था।  नए पुराने गीत सबसे ज्यादा वही सुनाई देते थे। रेडियो सीलोन की उदघोषिकाओ के बोलने का अटपटा  नमकिनी , जुकामी अंदाज चर्चा का विषय हुआ करता  था।  बुधवार और रविवार के दिन अमीन सयानी और तब्बस्सुम के नाम हुआ करते थे।  आकाशवाणी को कोई टक्कर देता था तो सिर्फ रेडिओ सीलोन।
सन  2000 आते आते देश की फिजाओ में निजी रेडिओ स्टेशनों ने अपनी संगीत लहरियां बिखेरना आरम्भ कर दी थी। इसके उदघोषकों को   रेडिओ जॉकी कहा जाने लगा।  इन 'आर जे' ने जिनकी उम्र महज बीस पच्चीस वर्ष हुआ करती थी अपनी' हिंगलिश' से ऐसा समां बाँधा कि पूरी महानगरीय युवा पीढ़ी ऍफ़ एम रेडिओ की मुरीद हो गई।
अचानक से सुचना प्रसारण मंत्रालय के बोझिल और उम्रदराज नौकरशाहों को अहसास हुआ कि आकाशवाणी इन ऍफ़ एम स्टेशनों से पिछड़ रही है , लिहाजा तुरत फुरत निर्णय लिया गया है कि अब वे भी अपने सौ से अधिक स्टेशनों में रेडियो जॉकी नियुक्त करेंगे।  आकाशवाणी आज अपनी हारी हुई लड़ाई लड़ रहा है।  निजी ऍफ़ एम चैनल जिस रफ़्तार से भाग रहे है उस हिसाब से आकशवाणी के अच्छे दिन दूर प्रतीत हो रहे है।
संसद में पूर्व यूपीए सरकार के पास 800 नए ऍफ़ एम चैनलों को आरम्भ करने का प्रस्ताव था जिसे निश्चित तौर  पर मोदी सरकार हरी झंडी दिखाएगी। उस द्रश्य की कल्पना करना आसान है जब छोट कस्बों में भी ऍफ़ एम चैनलों का   डिजिटल संगीत सुनाई देगा . आकशवाणी ने उससे  निपटने   लिए कुछ तो सोंच ही रखा होगा।
(वास्तविकता - इस समय देश में  आकाशवाणी के 171  व निजी ऍफ़ एम स्टेशनों की संख्या 248 है।  जो की जनसँख्या के  मान से काफी कम है। अमेरिका में इस समय  ऍफ़  एम के 6224 स्टेशन है जबकि शैक्षणिक कार्यक्रम प्रसारित करने  वाले 2447 ऍफ़ एम स्टेशन अलग से है )

Friday, August 22, 2014

Remake : बॉक्स ऑफिस का शार्ट कट

 हिंदी फिल्मे आय के नए रिकॉर्ड बना रही  है। हर सितारा कमाई के ऐसे शिखर बना  रहा है जिसे पहले कभी नहीं सोंचा गया। अकल्पनीय धन की इस बारिश में फिर भी कुछ रिता सा है। समस्त ब्लॉक बस्टर फिल्मों में एक बात समान है -  सभी फिल्मे किसी न किसी फिल्मो की रीमेक है।  चाहे फिर सलमान की ' किक ' हो या देवगन की ' सिंघम रिटर्न '
भले ही कोई इस बात को न माने परन्तु यह सत्य है कि बॉलीवुड इस समय कहानी के अकाल से जूझ रहा है। ख्यातनाम निर्माता निर्देशक थोक में सफल दक्षिण भारतीय फिल्मों के अधिकारों का सौदा कर रहे है। इस समय बॉलीवुड के  ' बिग डैडी ' करण जोहर और रोहित शेट्टी   सिर्फ और सिर्फ रीमेक पर ही काम कर रहे है। विदित हो कि करण जौहर ने घोषणा की है कि अस्सी के जमाने की सुपर हिट ' राम लखन ' के लिए सुभाष घई से चर्चा कर रहे है वहीँ रोहित शेट्टी शाहरुख़ के साथ  अमिताभ बच्चन की ' हम ' का रीमेक प्लान कर रहे है।
इस दौर में फिल्मे  माध्यम से ज्यादा अर्थशास्त्र हो गई है। पूंजी निवेश पर बेहतर रिटर्न की कामना करना हरेक फिल्म निर्माता का सपना होता है परन्तु जोखिम के नाम पर उधार की कहानी से पैसे बनाना कहाँ तक उचित है ? आश्चर्य होता है की फिल्म इंडस्ट्री में बरगद की तरह जड़े  जमाये लोग भी मौलिकता अपनाना नहीं   चाहते।
शाहरुख़ की आगामी फिल्म ' हैप्पी न्यू ईयर '  ट्रेलर में भी न जाने क्यों  जॉर्ज क्लूनी की ocean eleven की याद दिला रही है . पैसा वसूल दौर में सफलता का आग्रह विराट हो गया है , फिर चाहे फिल्म आठवे दिन ही दर्शक के दिलों दिमाग से विस्मृत हो जाए।  बेचारा दर्शक , न जाने कब तक बासी खिचड़ी नये बर्तन में खाता  रहेगा.
वैसे तो देश में लेखकों की कोई कमी नहीं है। हिंदी के साथ   समस्त प्रादेशिक भाषाओ  में भी  ढेरों कहानियाँ पाठको के अलावा दर्शकों तक जाने को बेताब है परन्तु तथाकथित प्रयोगधर्मी निर्माता - निर्देशक आजमाए फार्मूले से आगे बढ़ने को तैयार नहीं है। सिर्फ दर्शक ही इन ( रीमेक ) फिल्मों को नकार कर अपना निर्णय सुना सकते है।

Sunday, August 10, 2014

Indian Actors in Hollywood

पिछले बरस(2013 ) एक सुन्दर सी प्रेम कहानी आई थी '' लंचबॉक्स '' . इसकी साधारण शक्ल सूरत की नायिका इला (निमरत कौर ) अपने पति की बेरुखी की शिकार है। पति को प्रभावित करने के लिए वह स्वादिष्ट भोजन बना कर भेजती है , गोयाकि दिल का रास्ता पेट से होकर गुजरता है।   मुंबई जैसे शहर में कामकाजी लोगो तक टिफिन पहुचाना एक बड़ा व्यवसाय है। और उसका टिफिन पति को न पहुँच कर ''साजन '' (इरफ़ान खान ) को पहुँच जाता है। इसके बाद एक सिलसिला शुरू होता है इला और साजन के बीच लंचबॉक्स में रखकर पत्र भेजने  का। पूरी फिल्म मानो कविता कहती प्रतीत होती है।  एक रूहानी कविता।
                 निमरत कौर कई बरसों से मॉडलिंग कर रही है और हाल ही में '' कैडबरी सिल्क '' के लिए उनका किया गया एड काफी चर्चित रहा था। यही निमरत  कौर अब मशहूर अमेरिकन टीवी धारावाहिक '' Homeland '' के लिये चुन ली गई है। इस प्रसिद्द धारावाहिक में उनका किरदार पाकिस्तानी 'आई एस आई ' एजेंट का है। ( इस धारावहिक के चौथे सीजन की शूटिंग इन दिनों दक्षिण अफ्रीका के कैप टाउन में चल रही है )
                             निमरत की तरह और भी भारतीय एक्टर हॉलीवुड की पसंद बनते जा रहे है .निश्चित  रूप से हॉलीवुड के इस ताजा रुझान के पीछे भारतीय  दर्शक बाजार की विशालता से इंकार नहीं किया जा सकता। ''क्वीन'' में इटालियन एक्टर के साथ किये गए चुम्बन दृश्य से प्रभावित होकर इटली के प्रमुख निर्देशक एदारोडो दे अंजलिा ने कंगना रनावत को टॉप स्टार मिस्मिल्लानो गालो के साथ एक फिल्म ऑफर की है।
' बॉबी जासूस ' एक्टर अली फैज़ल को ' फ़ास्ट एंड फुरियस ' (fast and furious) के लिए अनुबंधित किया गया है। कुणाल नेय्यर अमेरिकन सिटकॉम ' द  बिग बैंग थ्योरी ' ( the big bang theory ) में 2007 से काम कर रहे है। चार दोस्त और उनकी आकर्षक पड़ोसन के इर्द गिर्द घूमता यह सीरियल 7 सीजन पूर्ण कर चूका है और कुणाल सभी में मौजूद है।
         
    भारतीय सितारों  की हॉलीवुड में बढ़ती  मांग और पहचान अच्छा संकेत है। बेहतर तो तब होगा जब देसी फिल्म निर्माता नई  कहानियों और गैर  परंपरागत विषयों पर ध्यान देना आरम्भ करेंगे।अन्यथा विदेशी ही हमें बतायेगे की  हमारे यहां किसमे कितना टेलेंट है। 

Wednesday, August 6, 2014

सफलता जिसकी भगत है !!

इस  समय देश में अंग्रेजी में लिखने वाले लेखकों में चेतन भगत का नाम सबसे ऊपर है। यही नहीं , वे इस समय सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखक(india's first best seller) भी  है . नो प्रकाशकों द्वारा ख़ारिज उनका पहला उपन्यास five point someone उन्हें उस बुलंदी पर लेकर गया है जिसका सपना हर लेखक देखता है। चेतन को पसंद करने वाले वे ही है जिन्होंने उम्मीदों के साथ नरेंद्र मोदी को प्रधान मंत्री बनाया है , बीस से तीस आयु वर्ग के युवा। सिंगापुर में सिटी बैंक की आराम तलब नौकरी को छोड़  कर लेखक बनने की उनकी कहानी उनके उपन्यासों की तरह ही रोमांचक और प्रेरणा दायक है।
                         चेतन के अब तक लिखे पांच उपन्यासों में से चार  पर फिल्मे बनकर जबरदस्त व्यवसाय  कर चुकी है। 'फाइव पॉइंट समवन ' ( थ्री इडियट ) 'वन नाईट एट   कॉल सेंटर '( हेलो ) टू  स्टेट ( टू स्टेट )' थ्री मिस्टेक्स ऑफ़ माय लाइफ '  ( कोई पो छे ).   हाल ही में प्रदर्शित सलमान की ब्लॉक बस्टर ( किक ) ने उनके लिए फिल्म स्क्रिप्ट के रास्ते भी खोल दिए है।
चेतन के आलोचकों का मानना है कि भले ही वे इतने लोकप्रिय और अमीर हो चुके  हों  परन्तु अंग्रेजी साहित्य के नामचीन लेखकों अरुंधती रॉय , विक्रम सेठ , अरविन्द अडिगा , कमला दास , आदि की तरह सम्मानीय नहीं हो पाये है। साहित्य जगत में चेतन को गंभीर लेखकों में नहीं माना जाता है। उनकी भाषा शैली और शिल्प औसत दर्जे का करार दिया गया है।
                                 फिर भी इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि देश का एक बड़ा वर्ग उनकी बाते ध्यान से सुनता है। यही वजह है कि समसामयिक घटनाओ पर उनका आलेख देश के प्रतिष्ठित अखबार ( the times of india ) में महीने में एक बार जरूर छपता है , उसके बाद उस लेख का अनुवाद दूसरे हिंदी भाषी अखबारों में नजर आता है। हाल ही में चेतन ने अपने अगले उपन्यास की घोषणा सोशल मीडिया पर की है ( हाफ गर्ल फ्रेंड ) half girlfriend उपन्यास संभवत अक्टूबर में आएगा परन्तु इस के प्रति उत्सुकता का आलम यह रहा की 5 अगस्त को चेतन के प्रशंसकों ने उपन्यास की कथा वस्तु जानने के लिए चेतन की वेब साइट पर इतनी बार विजिट की कि वह क्रैश हो गई।
                            किसी लेखक का लिखा साहित्य की श्रेणी में आता है या नहीं यह हमेशा से विवाद का विषय रहा है। परन्तु युवा पीढ़ी ( निश्चित तौर पर उनका कहानी सुनाने का ढंग ) चेतन को अंग्रेजी साहित्य में एक नयी परंपरा आरम्भ करने के लिए तो हमेशा याद रखेगी .

              

Friday, August 1, 2014

Amitabh in flop show..

अमिताभ बच्चन आज उस मुकाम पर आ पहुंचे है जहां एक दो असफलता और फ्लॉप का उनकी लोकप्रियता पर कोई असर नहीं होता। विगत वर्षों में उन्होंने सफलता के जितने प्रतिमान स्थापित किये है , वे मैनेजमेंट के छात्रों के लिए समर प्रोजेक्ट का काम कर सकते है।
 पिछले दिनों सोनी टेलीविजन पर बिग बी का बहुप्रतिक्षित धारावाहिक ' युद्ध ' आरम्भ हुआ। इस धारावाहिक के बारे में काफी समय से यह हवा बनाई जा रही थी कि'   24 ' (अनिल कपूर का निर्देशित और अभिनीत सीरियल ) के बाद यह धारावाहिक भी छोटे परदे की सास- बहु वाली छवि को बदल कर रख देगा। एक बात जो और इस मेगा सीरियल के बारे में सुनाई दे रही थी वह यह कि 2008 में अमेरिका में आरम्भ होकर 2013 तक पांच सीजन में चलने वाले सफलतम  क्राइम थ्रिलर ' ब्रेकिंग बेड ' के कथानक पर आधारित है। यह सारी  बाते आम दर्शकों और मेरे जैसे अमिताभ प्रेमियों को रात 10 : 30 बजे टेलीविजन पर तो खेंच लाई परन्तु रोककर न रख सकी।
इस धारावाहिक के इन्तजार में मेरे जैसे कई ' थ्रिलर ' पसंद दर्शकों ने इंटरनेट पर Breaking Bad के कई एपिसोड देख लिए थे। उत्सुकता महज इस बात की थी कि जिस तरह से  '24 ' के कथानक के साथ अनिल कपूर ने न्याय किया था वैसा अमिताभ Breaking Bad के साथ कर पाते है या नहीं ? परन्तु यह आशंका निर्मूल साबित हुई। सिवाय नायक को एक जान लेवा बीमारी के दोनों कथानक में कोई साम्य नहीं है। Breaking Bad का नायक जहां अपने lung cancer को अपने जीने का मकसद बना लेता है वहीँ युद्ध हमेशा confuse नजर आता है। एक बड़ा बिल्डर अपने साम्राज्य को बचाते हुए जिस तरह से भले आदमी का  लबादा ओढ़े रखता है वह अमिताभ की पुरानी ' ब्लॉक बस्टर - त्रिशूल  के ठीक उलट है। अमिताभ जिस तरह से मदर टेरेसा की तरह व्यवहार करते है वह भी गले नहीं उतरता।
                                  जिस तरह से  'युद्ध ' के कथानक को बिखेरा गया है और जिस तरह थका थका कथानक चलाया जा रहा है उससे तो इसके भी पांच सीजन की संभावना बनती है। परन्तु फिलहाल 20 एपिसोड दर्शकों को बाँध पाते है या नहीं ? यह देखना दिलचस्प होगा।


photo courtsey : google image

मास्को फिल्मोत्सव में बाहुबली

घर बैठे किसी भी देश को समझने का सबसे आसान तरीका है उस देश का साहित्य पढ़ना या फिल्मे देखना।  आजादी के तुरंत बाद जिस देश ने हमारा ह...