Friday, March 25, 2011

क्या आप हमारी तरफ देखेंगे मि. टेड टर्नर ...

मुझे आश्चर्य है कि टेड टर्नर को भारत में अपनी -सिर्फ क्लासिक 'ब्लेक एंड व्हाइट फिल्म दिखने वाली चेनल TNT के भारतीय संस्करण को लांच करने का ख्याल अभी तक क्यों नहीं आया ? टेड टर्नर 'टाइम वार्नर इंक' CNN न्यूज चेनल, और 'वार्नर ब्रदर ' के भी मालिक है. यूँ तो TNT पिछले पंद्रह सालो से भारत में(अमेरिकन क्लासिक)फिल्मे प्रसारित कर रहा है, परन्तु जिस तरह से उन्होंने TNT के 'स्पेनिश ' और 'तुर्की' संस्करण जारी किये है और कई यूरोपीयन संस्करणों पर काम जारी है वेसी ही गुंजाइश भारत में भी है .
भारत में प्रति वर्ष एक हजार से ज्यादा फिल्मे बनती है और पहली बोलती फिल्म आलम -आरा से लेकर 'ब्लेक एंड व्हाइट फिल्मो के पुरे दौर में बेहतरीन क्लासिक और यादगार फिल्मे बनी है.परन्तु उचित रख रखाव के आभाव में अधिकाँश फिल्मो के प्रिंट नष्ट होने का कगार पर है. फिल्मो के प्रिंट की अधिकतम उम्र 70 -80 बरस होती है, गर उन्हें दो डिग्री सेल्सियस और चोवीस डिग्री आन्द्रता में संरक्षित किया जाए तब .
दूसरी तरफ पुराने संगीत को संरक्षित करने में ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़े है. यह काम कम खर्च में बगेर कोई आन्दोलन किये संपन्न हो रहा है. इसे सहेजने में राष्ट्रीय रेडियो स्टेशन के अलावा निजी स्टूडियो ने भी विशेष रूचि दिखाई और समय समय पर ओल्ड -इस -गोल्ड नाम से संगीत जारी कर काफी धन कमाया है .
इस तथ्य से इनकार नहीं है कि पुरानी और क्लासिक फिल्मो के प्रिंट को डिजिटल करने का काम काफी खर्चीला है , परन्तु टेड टर्नर जेसे मीडिया सम्राट के लिए यह काम आसान है.उन्होंने अमेरिका में 1939 से लेकर ब्लेक एंड व्हाईट दौर कि अधिकाँश फिल्मो को सहेज कर अपने टेलीविजन पर प्रसारित किया है और कुछ फिल्मो को रंगीन करने की आलोचना भी झेली है.
हमारे देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों ने भी पिछले कुछ समय से फिल्मो को व्यापार के रूप में लेना शुरू किया है . अनिल अम्बानी ग्रुप , सन टीवी , आदि विशेष रूप से सक्रिय है , परन्तु इनका भी रुझान फिल्म निर्माण और फिल्मो के लिए वित्त उपलब्ध करने तक ही है .कुछ लोग अवश्य टेलीविजन चेनल शुरू कर चुके है परन्तु वे मनोरंजक चेनल और न्यूज चेनल पर ही अटके हुए है
भारत के फिल्म प्रेमी दुआ ही कर सकते है कि टेड टर्नर का ध्यान इस तरफ जाए ..या हमारे अनिल अम्बानी , सुभास चन्द्रा या दयानिधि मारन को कुछ नया करने का जूनून आये .
(टेड टर्नर की मशहूर अभिनेत्री पत्नी जेन फोंडा ने अस्सी के दशक में योग के माध्यम से अपना 'काया-कल्प ' किया था. अपना फिटनेस विडियो जारी करने वाली वे पहली स्टार थी. भारत में उनका अनुसरण कर निख़रने वाली सर्वप्रथम अभिनेत्री रेखा थी )

Tuesday, March 22, 2011

साथी हाथ बढाना .

सोशल नेटवर्किंग साईट कितनी गहराई तक आम जन को प्रभावित कर रही है , इसका सर्वोत्तम उदाहरण है प्रयोगधर्मी फिल्मकार ओनिर की 22 अप्रेल को रीलिज होने वाली फिल्म आई एम् . ओनिर मूलतः भूटान के रहने वाले है . 26 \11 के आतंकवादी हमले के ठीक एक दिन बाद उनकी फिल्म सॉरी भाई देश के अचानक बदले हालत के चलते बॉक्स ऑफिस पर पानी भी नहीं मांग सकी थी . इस फिल्म की नाकामयाबी ने ओनिर को एकदम घर बेठा दिया था . फिल्म नगरी में एक जुमला हमेशा चर्चा में रहता है '' शुक्रवार का दिन नया सूरज उगता है और कोई सितारा अस्त हो जाता है '' विदित हो कि माया नगरी में सारी नयी फिल्मे शुक्रवार को ही रिलीज होती है . वेसे इस रिवाज को तोड़ने का बीड़ा घोर अन्धविश्वासी एकता कपूर ने उठाया है . एक समय'' क'' नाम से अपनी टीवी सोप और फिल्मे शुरू करने वाली एकता अपनी नयी फिल्मे गुरुवार को रिलीज करने जारही है . बहरहाल !
बात चल रही थी ओनिर की...बर्बादी के छोर पर खड़े ओनिर को किसी दोस्त ने सुझाया कि इस तरह सर पर हाथ रख कर मातम मनाने के बजाये कुछ नया किया जाए . और मंथन के बाद जो विचार सामने आया वह आई एम् है . ओनीर ने फेसबुक के माध्यम से अपने दोस्तों से पैसा एकत्र किया . उन्होंने सभी दोस्तों से आग्रह किया था कि वे एक हजार या उससे ज्यादा की राशि देकर फिल्म का हिस्सा बने . कुछ दोस्तों ने अपनी कार भेज दी, कुछ ने फिल्म की यूनिट के भोजन की व्यवस्था की . इस तरह देश के छयालिस शहरो से सेकड़ो लोगो ने फिल्म के लिए तीन करोड़ रूपये जुटाए . इतना ही नहीं, फिल्म के सभी एक्टर - संजय सूरी , मनीषा कोइराला , राहुल बोस , अभिनव कश्यप , जूही चावला आदि ने मुफ्त में काम किया है .
फिल्म का हश्र चाहे जो पर ओनिर की जीवटता , दोस्तों का सहयोग और फेसबुक की भूमिका हमेशा मिसाल बनी रहेगी .
लगे हाथ - फ़िल्मी दुनिया में बिता हफ्ता कही ख़ुशी कही गम वाला रहा . नविन निशचल, और बोब क्रिस्टो का अवसान हो गया . दूसरी तरफ बच्चन परिवार ने इनकम टेक्स के रूप में 37 .55 करोड़ रूपये जमा किये . 'धोबी घाट' को मिली सफलता के चलते आमिर खान ने किरण राव को BMW सिरीज की कार उपहार में दी .

Monday, March 14, 2011

एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा .....


अपने समय की 'मीना कुमारी ' के नाम से प्रसिद्ध मनीषा कोइराला एक लम्बे अरसे बाद परदे पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली है . प्रयोगधर्मी डायरेक्टर ओनिर की 22 अप्रेल को रिलीज होने वाली फिल्म 'आई ऍम ' में दो अभिनेत्रिया , जूही चावला , व मनीषा कोइराला लम्बे अवकाश के बाद फिल्मो में वापसी के लिए कोशिश करेगी . उगते सूरज को नमन करने वाले और उतरते को उपेक्षित करने वाले इस उद्योग की निर्ममता का शिकार हरेक एक्टर को होना पड़ा है . बावजूद इसके - बोलीवूड को जाने वाले देश के हरेक रास्ते पर हमेशा रेलम - पेल मची रहती है .
69 फिल्म पुरानी मनीषा, फिलहाल नेपाल के उद्योगपति 'सम्राट दहल ' से शादी कर आराम की जिन्दगी बसर कर रही है . परन्तु फिल्मो से चाह कर भी दूर नहीं हो पा रही है . और हो भी केसे ? मनीषा जब भी अपने दो दशक पुराने फ़िल्मी सफ़र पर नजर डालती है उन्हें अपनी सफल फिल्मो की कतार बेचेन कर डालती है . आर्क लाईट का यह आकर्षण एक्टर को ढंग से सोने भी नहीं देता है. दर्शक फिल्मो को नकार - नकार कहता है की भाई अब हम आपको नही देखना चाहते है . परन्तु एक्टर का दिल नहीं मानता . सबसे बढिया उदाहरण गोविंदा है . अपने करियर की ढलान पर खड़े गोविंदा आज स्वयं अपना ही केरीकेचर बन गए है .
बात हो रही थी मनीषा कोइराला की !! इस लाजवाब सुन्दरी ने अपने फ़िल्मी सफ़र को तीन फिल्म फेयर और तीन अन्य पुरुस्कारों से संवारा है . संजय लीला भंसाली के निर्देशकीय करियर की पहली फिल्म ' ख़ामोशी ' भले ही बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर पाई थी परन्तु मनीषा के बेजोड़ अभिनय के लिए हमेशा याद की जायेगी . ' अकेले -हम अकेले -तुम ' और इन्द्र कुमार की' मन' ने दर्शको को बाल्टी भर आंसू बहाने के लिए मजबूर किया था.
विधु विनोद चोपड़ा की स्वतंत्रता संग्राम की प्रष्टभूमि पर लिखी काल्पनिक कहानी ' 1942 ए लव स्टोरी ' विधु विनोद चोपड़ा और मनीषा दोनों के करियर में महत्व पूर्ण स्थान रखती है. इस फिल्म के लिए भी मनीषा को फिल्म फेयर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया था . इस फिल्म के लिए जावेद अख्तर का लिखा गीत ' एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा ..' आज बीस साल बाद भी पुराना नहीं लगता है .
सफलता की झोंक में हर सितारा लडखडाता है . शीर्ष पर मनीषा ने भी अपने करियर को कुछ लापरवाहियों और कुछ अपनी आदतों से तबाह किया . शादी शुदा नाना पाटेकर से रोमांस ,सन 2001 में आस्ट्रेलियाई राजदूत से रिश्तो की अफवाह, अमरीकी सीनेट के स्पीकर क्रिस्टोफर डोरिस से जुड़ने की अटकले , खुले आम सिगरेट और शराब के सेवन ने मनीषा की मासूम शक्ल से मिली सहानुभति को धो कर रख दिया था .
इसके अलावा फिल्म निर्माण में अमरीका से किया डिप्लोमा और उस अधूरे ज्ञान से फिल्म प्रोडूस करने का निर्णय भी आर्थिक रूप से भारी पड़ा था . ओनिर की फिल्म' आइ एम् ' के अलावा मनीषा की एक और फिल्म प्रदर्शित होने वाली है . दीप्ती नवल निर्देशित '' दो पेसे की धुप चार आने की बारिश '' फिल्म का प्रदर्शन उपयुक्त डिस्ट्री बयूटर न मिलने के कारण अटका हुआ है .
लगे हाथ ---मनीषा ने अपने पति सम्राट दहल को फेसबुक के माध्यम से खोजा था

Monday, March 7, 2011

:पल दो पल का शायर ....



''मसरूफ जमाना मेरे लिए क्यू वक्त अपना बर्बाद करे '' अपनी मृत्यु से तीन साल पहले शायद विधाता ने यह शब्द साहिर लुधियानवी से कहलवा दिए थे . स्वयं साहिर को भी समाज की संवेदन शुन्यता का अंदाजा नहीं होगा कि देश उनके योगदान को इस तरह बिसार देगा. लुधियाना ,जहां उनका जन्म हुआ और बचपन बीता और जो सारी उम्र उनके नाम से पहचान पाता रहा , ने भी साहिर की याद को जिन्दा रखने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई . आज लुधियाना में साहिर के नाम पर कोई स्मारक नहीं है न ही कोई सड़क उनका नाम पाकर धन्य हुई है . जबकि अपनी नज्मो , गीतों , से साहिर ने देश का नाम सरहदों के पार तक रोशन किया .
प्रेम की पराकाष्टा से दुनिया को परिचित कराने वाले इस गीतकार के लिए यह फक्र की बात है कि एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरता है जब रेडिओ श्रोता साहिर के लिखे गीत की फरमाइश न करते हो .
मात्र उन्नीस बरस की उम्र में साहिर लुधियानवी ने मुग़ल सम्राट शाहजहाँ को कटाक्ष करते हुए नज्म लिखी थी '' एक शहंशाह ने दौलत का सहारा लेकर हम गरीबों का उड़ाया है मजाक '' इस बात का प्रतिक थी की इस शायर के पास कहने को बहुत कुछ है .
प्रेम की बात करने वाले साहिर के जीवन की विडम्बना थी कि वे प्रेम में असफल रहे थे . उनका पहला प्रेम गायिका सुधा मल्होत्रा से हुआ था जो ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया . फिर उनके जीवन में अमृता प्रीतम आई जो उनसे अंतिम समय तक जुडी रही. अमृता -साहिर ने अपने रिश्ते को कभी नाम देने की कोशिश नहीं की . ऐसा कई बार होता था जब वे लोग आमने सामने होकर भी बगेर एक शब्द कहे जुदा हो जाते थे . साहिर के प्रेम में गहराई थी .इसके उलट अमृता उतनी ही मुखर थी . अमृता ने अपनी किताबो , साक्षात्कारों में खुल कर साहिर के प्रति अपने प्रेम को स्वीकारा, बावजूद इसके दोनों के बीच कोई अद्रश्य बाधा रही थी कि साहिर ता -उम्र अविवाहित ही रहे .
आठ मार्च को हम साहिर का जन्म दिन मना रहे है ....इस विडम्बना के साथ कि 25 अक्टूबर 1980 को साहिर कि मृत्यु के बाद जुहू कि जिस कब्रिस्तान में साहिर को दफ़न किया गया था उस कब्र को 2010 में पुनर्निर्माण के नाम पर हटा दिया गया है . ( मधुबाला की कब्र के साथभी इसी तरह का हादसा हो चुका है )अब साहिर के प्रशंशक उनकी कब्र पर फूल भी नहीं चडा सकते है .
लगे हाथ ---लोकप्रियता के चरम पर ''नया दौर '' फिल्म के गीतों के लिए साहिर ने लता मंगेशकर के मेहनताने से एक रुपया ज्यादा माँगा था . यह बड़ी गुस्ताफी थी .परन्तु साहिर के उस समय के कद के हिसाब से निर्माता को यह मांग पूरी करना पड़ी थी . और यह साहिर ही थे जिनके दबाव के चलते आल इंडिया रेडिओ ने गायक के साथ गीतकार और संगीतकार का नाम उदघोषित करना शुरू किया .

Saturday, March 5, 2011

सफलता जिसकी भगत है ...


किसी भी युवा लेखक के लिए इससे बड़ी बात नहीं हो सकती कि उसका लिखा उपन्यास ' बेस्ट सेलर ' बन जाए , फिर उस पर बनी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धन -वर्षा कर दे और फिर उसी उपन्यास को ' नाटक ' में रूपान्तर करने कि बात चले और वह नाटक भी सफल रहे . इस तरह की बाते अभी तक अंग्रेजी भाषी देशों के लेखकों के बारे में ही सुनी जाती थी . परन्तु हमारे देश के ही अंग्रेजी में लिखने वाले लेखक चेतन भगत ने उपरोक्त तीनो पड़ाव हासिल किये है , अपने उपन्यास ' फाईवपॉइंट समवन ' से .
इस उपन्यास पर बनी फिल्म 3 इडियट की सफलता मील का पत्थर बन चुकी है . कुछ समय पूर्व चेन्नई के दो युवको ने अपना जमा जमाया करियर छोड़ कर इस उपन्यास का नाट्य रूपांतरण तेयार किया और बंगाल और चेन्नई में पचास से ज्यादा से ज्यादा स्टेज शो इस नाटक के कर चुके है .शीघ्र ही यह नाटक मुंबई में मंचित किया जाएगा जिसमे स्वयं चेतन भगत भी छोटा सा किरदार निभायेगे .
चेतन भगत ने अभी तक कुल जमा चार उपन्यास लिखे है और जबरदस्त सफल रहे है . हाल ही में साजिद नडियाद वाला ने उनके उपन्यास' टु स्टेट: स्टोरी ऑफ़ माय मेरिज ' के अधिकार ख़रीदे है . इस पर बनने वाली फिल्म को विशाल भारद्वाज डायरेक्ट करेगे और नायक होंगे शाहरुख . इस फिल्म के साथ भगत एक रिकार्ड और बनायेगे . वह होगा- तीनो खान का उनकी लिखी कहानियो पर बनने वाली फिल्म का नायक होने का . सलमान अभिनीत ' हेल्लो ' उनके उपन्यास - ''वन नाईट एट कॉल सेंटर '' पर आधारित थी , जो की ख़राब प्रदर्शन के कारण कभी चर्चा में नहीं रही .
'फाईव पॉइंट समवन ' नाटक की सफलता ने उनके दुसरे उपन्यासों के नाट्य रूपांतरण के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया है . टु स्टेट : स्टोरी ऑफ़ मेरिज का नाट्य रूपांतरण शीघ्र ' नेशनल सेंटर फॉर परफोर्मिंग आर्ट्स के जरिये किया जाएगा .
लगे हाथ ----सन 2010 में टाइम मेग्जिन ने चेतन भगत को 100 प्रभावशाली लेखको में शामिल किया है .चेतन अपना अगला उपन्यास दिवालीके आस -पास प्रकाशित करने वाले है .

Thursday, March 3, 2011

परदे पर भी कहर बरपाएगी विकिलीक्स ...


2012 के ओस्कर पुरुस्कारों में बेस्ट डायरेक्टर के लिए एक नाम होगा ' स्टीवेन स्पीलबर्ग '....हेरानी की बात नहीं क्योंकि स्पीलबर्ग की कंपनी ड्रीम वोर्क्स ने जुलियन अस्संजे पर लिखी दो किताबो के राईट ख़रीदे है . एक विकिलीक्स के पूर्व कार्यकर्त्ता डेनियल बर्ग द्वारा लिखी “Inside WikiLeaks: My Time with Julian Assange at the World's Most Dangerous Website,'' और दूसरी है “WikiLeaks: Inside Julian Assange's War on Secrecy,” by David Leigh and Luke Harding ...ये दोनों ब्रिटेन के गार्डियन अखबार के बन्दे है .
हाल ही में ओस्कर में चर्चित '' सोसल नेटवर्क '' की सफलता से इस फिल्म को लेकर जिज्ञासा बदना स्वाभाविक है .वह फिल्म फेसबुक के निर्माता मार्क जुकेर्बेर्ग के जीवन पर थी और यह फिल्म गुप्त दस्तावेजो के प्रकाशक जुलियन अस्संजे की वेब साईट विकिलीक्स को लेकर है .
फिलहाल अभी कुछ भी कहना जल्दीबाजी होगी . स्पीलबर्ग ने न तो फिल्म की कास्ट का चुनाव किया है न ही कहानी पर काम शुरू किया है . फिर भी, भूरी आँखों और सफ़ेद बालों वाले इस शख्स का फ़िल्मी रूपांतरण दिलचस्प तो होगा ही .
(जुलियन अस्संजे ने अपना नाम रजिस्टर्ड कराने के लिए(कापी राईट कराने के लिए ) लन्दन में आवेदन किया है .-और ऐसा करने वाले वे पहले व्यक्ति नहीं है .उनके साथ इस दौड़ में और भी लोग शामिल है जेसे ... विख्यात गायिका लेडी गा -गा , अमरीका में उपराष्ट्रपति का चुनाव हारी सुन्दर सारा पालिन और किशोर अवस्था में गर्भवती हुई उनकी बेटी ब्रिस्टल पालिन ...इन सभी को लगता है कि उनका नाम अनुपम है ...)

अपने पे भरोसा है तो दांव लगा ले !!


न्यूज़ीलैंड के एक रेडियो स्टेशन पर एक प्रतियोगिता हुई है जिसका ईनाम बड़ा ही अनोखा है. श्रोताओं से कहा गया है कि विजेता को यूक्रेन की एक महिला बतौर ‘पत्नी’ ईनाम में मिलेगी.

ज़ाहिर है यूक्रेन में महिला कार्यकर्ता इसे लेकर बेहद नाराज़ हैं और विरोध प्रदर्शन कर रही हैं.

नौ महिलाओं ने राजधानी कीव में शादी पंजीकरण कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और वो भी टॉपलेस. इनके हाथों में तख़्तियाँ थीं जिस पर लिखा था- यूक्रेन कोई वेश्यालय नहीं है.

सोमवार को न्यूज़ीलैंड के रॉक एफ़एम ने ग्रेग नामक व्यक्ति को विजेता घोषित किया है.इस प्रतियोगिता के कारण न्यूज़ीलैंड में भी विवाद छिड़ा है. हालांकि रेडियो स्टेशन का कहना है कि ये हल्के फुल्के अंदाज़ में किया गया था.

जब इस प्रतियोगिता की घोषणा की गई थी तो रॉक एफ़एम के प्रोग्राम निदेशक ब्रैंड किंग ने कहा था, “अंत में तो ये लोगों पर निर्भर करता है कि वे शादी करने का फ़ैसला लेते हैं और न्यूज़ीलैंड वापस आना चाहते हैं या नहीं. हम असल में किसी की शादी नहीं करवाने जा रहे, न ही किसी महिला को न्यूज़ीलैंड ला रहे हैं.”

लेकिन प्रतियोगिता के बारे में वेबसाइट पर लिखी जानकारी से लगता है कि रेडियो स्टेशन को अनुमान था कि लोग स्पर्धा में हिस्सा लेंगे.वेबसाइट की एंट्री में लिखा है कि ऐसा सच में होगा.

प्रतियोगिता के विजेता 23 मार्च को 12 दिन के लिए यूक्रेन की सैर पर जाएँगे.

ईनाम की शर्तों के तहत विजेता यूक्रेन की महिला का चुनाव पहले से ही कर सकेगा और इसके लिए एंडलेस लव डेटिंग एजेंसी की मदद ली जाएगी.

ये एजेंसी यूक्रेन की सैर का इंतज़ाम करेगी और दोनों को एक साथ मिलाएगी. ईनाम में रिवर क्रूज़ और दुभाषिए की सुविधा भी शामिल है.

रेडियो स्टेशन की वेबसाइट पर लिखा है, “ईनाम में ये बात शामिल नहीं है कि यूक्रेन की महिला के लिए विज़ा की अर्ज़ी हम लगाएँगे या उसके न्यूज़ीलैंड आने की टिकिट देंगे. ये विजेता की ज़िम्मेदारी होगी. ऐसा दोनों पक्षों की सहमति से ही होगा.”

यूक्रेन में इस प्रतियोगिता का विरोध करने वाले फ़ेमेन गुट का कहना है कि न्यूज़ीलैंड का सौभाग्यशाली विजेता यूक्रेन में दुखद स्वागत की उम्मीद कर सकता ये महिलाओं फ़ेमन ग्रुप से जुड़ी हैं. ये संगठन उन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाता है जो सेक्स टूर के लिए यूक्रेन की महिलाओं को निशाना बनाती हैं.

मास्को फिल्मोत्सव में बाहुबली

घर बैठे किसी भी देश को समझने का सबसे आसान तरीका है उस देश का साहित्य पढ़ना या फिल्मे देखना।  आजादी के तुरंत बाद जिस देश ने हमारा ह...