Sunday, July 22, 2012

हमारे नायक कलमाड़ी और और उनका ओलिम्पिक ...

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कुछ माह पहले अपने एक आलेख में लिखा था कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने जितना समय जेल के अन्दर बिताया है उतनी सजा उन्हें अब शायद ही इस जन्म में मिले . यह तात्कालीन न्याय व्यवस्था के खिलाफ हताशा  के शब्द थे. एक तरह से भविष्यवाणी थी कि इस देश में आर्थिक भ्रष्टाचारी को बिरले ही सजा मिलती है . गौर तलब है कि सुरेश कलमाड़ी ( अब यह नाम परिचय का मोहताज नहीं रहा ) भारतीय ओलिम्पिक  दल के साथ लन्दन जा रहे है .




इस बात से भारतीय खिलाड़ियों का कितना प्रोत्साहन होगा? यह बात पदक तालिका सिद्ध कर देगी परन्तु यह कलमाड़ी के लिए पुरूस्कार से कम नहीं कि देश ने उनकी काबलियत(?) पर भरोंसा किया . कामन वेल्थ खेलों का ही एक और प्रसंग है - इन खेलों के दौरान बजने वाले प्रेरणा गीत को ए रहमान ने अपने सुर और आवाज दी थी . रहमान साहब ने अपने इस योगदान कि कीमत मात्र पांच करोड़ वसूली थी . वही लन्दन से खबर आरही है कि यूरोप और इंग्लैंड कि नामचीन सिने जगत की हस्तिया ( कृपया नामों पर गौर करे और और उनकी अन्तराष्ट्रीय हेसियत देखे ) नाओमी केम्पबेल , पॉल मेकर्तानी, केट मोस , एल्टन जॉन , ----ये लोग मात्र एक पौंड के सांकेतिक मेहनताने पर ओलिम्पिक समापन समारोह में अपनी कला का प्रदर्शन करने जा रहे है . 

चरित्र , देश प्रेम , हमें अब भी बहुत कुछ सीखना बाकी है 

मैडम तुसाद में एक लड़की भीगी भागी सी

'' एक धूप का टुकड़ा हमे थोड़ी देर के लिये उधार दिया गया था " अरुंधति रॉय के बुकर विजेता उपन्यास की यह लाइन मधुबाला के ...