Thursday, November 17, 2011

जेम्स तुम्हे एक बार फिर दुनिया को बचाना है !


अगले बरस शायद इन्ही दिनों में जेम्स बोंड की नयी फिल्म '' स्काईफाल '' धूम मचा रही होगी. फिल्म का पहला शोट लन्दन  में सात नवम्बर को लिया गया है .सन 2012 में जेम्स बोंड की फिल्मे पचासवी वर्षगाँठ मना रही है  . डेनियल क्रैग अभिनीत यह फिल्म 007 सीरिज  की 23 वी फिल्म होगी . उल्लेखनीय है कि इस फिल्म में भारतीय रेलवे को ध्यान में रखकर कुछ द्रश्य लिखे गए है . संभव है जेम्स 'कोंकण रेलवे' या ''पेलेस ऑन व्हील '' पर अपने हेरत अंगेज स्टंट करते नजर आये . फिल्म की स्क्रिप्ट का  कई दिनों तक अध्यन  करने के बाद रेलवे मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ ओस्कार विजेता निर्देशक सेम मेंडिस को भारत में शूटिंग करने की इजाजत दे दी है . शर्ते सिर्फ इतनी सी है कि दरवाजे पर लटकते हुए या छत पर सवारी करते यात्रियों के द्रश्य फिल्म में नजर नहीं आने चाहिए .
इयान  फ्लेमिंग की लिखी कहानियो पर आधारित जेम्स बोंड फिल्मों की शुरुआत 1962 में शॉन कोनरी अभिनीत फिल्म '' डॉक्टर नो '' से हुई थी . शॉन कोनरी ने किताब के पन्नो से आगे जाकर इस चरित्र  में ऐसी जान फूंकी  कि आज तक जेम्स का किरदार अपनी पहचान और साख बनाये हुए है . 


समय के साथ फ्लेमिंग की कहानियों में थोड़े बहुत परिवर्तन भी किये गए है . और हर नयी फिल्म का बजट पहले से ज्यादा रखा गया है . डेनियल  क्रैग की इस श्रंखला की पहली फिल्म ''केसिनो रोयल'' की नायिका एवा ग्रीन  को फिल्म के क्लाइमेक्स  में ही मार दिया गया था जबकि मूल कहानी में वह जीवित रहती है . इसी तरह' एम् ' के किरदार को नयी फिल्म में केंद्र में रखा गया है . जबकि मूल कहानियों में उनका किरदार महज जेम्स की खुर्राट बॉस का ही रहता है .
उनतीस बरस पहले(1982 ) रोजेर मूर अभिनीत ओक्टोप्पुसी की शूटिंग उदयपुर के लेक पेलेस में हुई थी , जिसमे कबीर बेदी के साथ टेनिस सितारे विजय अमृतराज भी छोटी भूमिकाओ में नजर आये थे .

Friday, November 11, 2011

Iconic movie sholay


छतीस बरसों से सुर्ख़ियों  में रही फिल्म '' शोले '' सन 2012  में एक बार फिर परदे का मुह देखेगी .  इस बार यह नए अवतार में होगी . कल्पना कीजिये , गब्बर ठाकुर से कहेगा ' यह हाथ मुझे दे दे ठाकुर ' और अगले ही पल आपकी आँखों के एकदम नजदीक तलवार लहरेगी और आपको महसूस होगा की खून के छीटे आपके चहरे पर भी आजायेंगे और आप झटके से अपना चेहरा बचाने के लिए अपने हाथों को सामने ले आयेंगे . या फिर महबूबा , महबूबा गाते हुए हेलन आपके नजदीक आजायेगी . शोले 3 - डी में बदली जा रही है . यह चमत्कार करने जारही है प्रोडूसर डायरेक्टर केतन मेहता की कंपनी माया डिजिटल स्टूडियो . केतन मेहता के लिए यह प्रोजेक्ट आसान नहीं रहा है. पिछले एक बरस से फिल्म पर काम चल रहा है . यह काम शुरू हुआ था तब स्टीवन स्पीलबर्ग ख़ास तौर पर मुंबई आये थे और केतन मेहता की कम्पनी के काम से खासे प्रभावित भी हुए थे . विदित हो की स्टीवन स्पीलबर्ग की कंपनी ड्रीम वल्ड और अनिल अम्बानी की कंपनी रिलायंस बिग के बीच फिल्म निर्माण को लेकर बड़ा समझोता हुआ है .
अभी तक भारत में 3  -डी फिल्मों को छापर फाड़ सफलता नहीं मिली है . हांलाकि भारत की पहली 3  -डी फिल्म छोटा चेतन जरुर सफल रही थी परन्तु वह दौर तकनीक की शुरुआत का था और इस तरह के सुविधाजनक सिनेमा घर भी न के बराबर थे.  अब जबकि 3  -डी का जादू टेलीविजन तक आगया है तब आप इस तकनीक के चमत्कारिक परिणामो की उम्मीद कर सकते हो . स्वयं स्टीवन स्पीलबर्ग की ताजा फिल्म ''एडवेंचर ऑफ़ टिनटिन'' 3  -डी में धूम मचा रही है .
शोले की नए अवतार में सफलता भारत में फिल्मों के नए रूप को स्थापित कर लुभावना स्वरुप दे देगी . 

मैडम तुसाद में एक लड़की भीगी भागी सी

'' एक धूप का टुकड़ा हमे थोड़ी देर के लिये उधार दिया गया था " अरुंधति रॉय के बुकर विजेता उपन्यास की यह लाइन मधुबाला के ...