Tuesday, October 25, 2011

डर बिकता है !! [2]

सन 2008 में राम गोपाल वर्मा '' फूंक '' लेकर आये थे . काले जादू पर आधारित फिल्म का खास चरित्र एक कोवा था . जब भी कोवा स्क्रीन पर नजर आता था दर्शक के बदन में ठंडी लहर दौड़ जाती थी . इस फिल्म ने कमाल का डर  पैदा किया था . हांलाकि फिल्म में सारे आजमाए हुए फार्मूले थे , फिर भी फिल्म अच्छा डर पैदा करने में कामयाब रही थी . यंहा राम गोपाल वर्मा की पूर्व फिल्मों की बात करना जरुरी होगा . 1991 में उन्होंने रेवती को लेकर '' रात '' बनाई थी. इस फिल्म का ओपनिंग सीन ही रीड की हड्डियों में सिहरन लाने के लिए काफी था . फिल्म का नाम रात था परन्तु डर पैदा करने वाले सभी द्रश्य दिन के थे . इस फिल्म में केमरे का काम जबरदस्त था . एक अद्रश्य कलाकार की शक्ल में केमरा नायिका का लगातार पीछा करता चलता है  . आगे चल कर राम गोपाल वर्मा ने अपनी इस खूबी को अपना ' सिग्नेचर ' ही बना लिया. अपराध पर आधारित उनकी अधिकाँश फिल्मो में केमरे के देखने के  एंगल ने फिल्म को ज्यादा आकर्षक बनाया . फिर वो ' अब तक छप्पन  ' हो या कुछ माह पूर्व आई ' नॉट ए लव स्टोरी हो ' . 

1 comment:

  1. मुझे कुछ कुछ याद आ रहा है.... रामगोपाल वर्मा ने फूंक फिल्‍म के अंत में coming soon part 2.....ऐसा कुछ लिखा था पर ये पार्ट 2 अब तक नहीं आया शायद......
    रामगोपाल वर्मा की डरावनी फिल्‍मों में बेकग्राऊंड म्‍यूजिक से लोगों को डराने के अलावा कुछ और नहीं दिखा मुझे तो...
    बहरहाल, आपकी एक और अच्‍छी प्रस्‍तुति।


    दीप पर्व की शुभकामनाएं......

    ReplyDelete

मास्को फिल्मोत्सव में बाहुबली

घर बैठे किसी भी देश को समझने का सबसे आसान तरीका है उस देश का साहित्य पढ़ना या फिल्मे देखना।  आजादी के तुरंत बाद जिस देश ने हमारा ह...