
कर्नल रंजीत, सुरेंद्र मोहन पाठक ,जेम्स हेडली चेस ,के जासूसी उपन्यासों की फेहरिस्त में वेद प्रकाश शर्मा का नाम भी था। होने को गुलशन नंदा भी थे परंतु उनके उपन्यासों का केंद्रीय भाव ' प्रेम ' होता था। गुलशन नंदा काफी ऊंचाई हासिल कर चुके थे और फिल्मों के लिए भी लिखने लगे थे। राजेश खन्ना के लिए उन्होंने कई फिल्मे लिखी थी। राजेश खन्ना का मतलब होता था ' भावुक -रुमानियत - आदर्शवादी प्रेम। ऐसे ही गुलशन नंदा के नावेल थे।

मेरे ' पढ़ाकू ' सफर में वेद प्रकाश शर्मा भी पड़ाव बनकर आये जो जासूसी कहानियों की ललक में शरलॉक होम्स और अगाथा क्रिस्टी के बाद आज भी जारी है। उनका अवसान मेरे जैसे लाखों पाठकों के लिए व्यक्तिगत क्षति है। मेरा यह लेख उनके लिए विनम्र आदरांजलि है।
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